देवरिया। भटनी क्षेत्र के बलुआ अफगान गांव के मौनिया टोला निवासी पशु तस्कर सुनील की कुशीनगर जिले में गिरफ्तारी के बाद दोनों जिलों की पुलिस सक्रिय हो गई है। बिहार प्रांत की विजयीपुर, भोरे और कटेया पुलिस भी तस्करों पर शिकंजा कसने के लिए तैयारी में जुट गई है।
गिरफ्तार तस्कर से पूछताछ में कई अहम सुराग मिले हैं, जिनके आधार पर दोनों जिलों में फैले रैकेट का पता लगाया जा रहा है।
पुलिस को आशंका है कि देवरिया–कुशीनगर सीमा के गांवों और संकरी सड़कों का उपयोग पशु तस्कर कर रहे हैं। यही कारण है कि सीमावर्ती गांवों में पुलिस की विशेष निगरानी बढ़ा दी गई है। कुशीनगर और देवरिया पुलिस की संयुक्त कार्रवाई में अब तक कई संदिग्धों की पहचान की गई है। बिहार सीमा से लगे इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है।
बिहार के विजयीपुर, भोरे और कटेया थानों ने भी पशु तस्करों की अलग-अलग सूची तैयार कर उनकी तलाश तेज कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, रात के समय ट्रैक्टर, पिकअप और मैजिक से पशुओं को ले जाकर सीमावर्ती रास्तों से बिहार में पहुंचाया जाता है। कई बार ग्रामीणों ने विरोध भी किया लेकिन तस्कर भाग निकलते हैं।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पशु तस्करी पूरी तरह रोकना चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि तस्कर लगातार रास्ते और तरीके बदलते रहते हैं। इसके बावजूद सीमावर्ती पुलिस पिकेट, रात्रि गश्त और वाहनों की चेकिंग को और अधिक सख्त किया गया है।
पशु तस्करी के नेटवर्क को तोड़ने के लिए देवरिया और कुशीनगर की पुलिस समन्वय बनाकर अभियान चला रही है। अधिकारियों ने कहा कि जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं और पूरे गिरोह का पर्दाफाश होगा।
शराब की लत ने सुनील को बनाया अपराधी : भटनी। कुशीनगर के तुर्कपट्टी क्षेत्र में पकड़ा गया सुनील कुशवाहा बचपन में सामान्य और शांत स्वभाव का था लेकिन समय के साथ उसकी राह बदलती चली गई।
ग्रामीणों के मुताबिक सुनील पहले शराब के नशे का शिकार हुआ, फिर युवावस्था में वह एक आर्केस्ट्रा दल से जुड़ गया। यहीं से उसकी संगत बदली और धीरे-धीरे वह तस्करी के दलदल में फंस गया।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुनील को जल्दी पैसे कमाने की चाह थी।
इसी लालच में उसने पहले शराब तस्करी का काम शुरू किया और कुछ समय बाद पशु तस्करी के रैकेट में भी शामिल हो गया। क्षेत्र में उसकी गतिविधियां लंबे समय से संदेह के घेरे में थीं।