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Deoria News: चुस्की सेहत पर न पड़ न जाए भारी, बाजार में बिक रही केमिकल मिली खुली चायपत्ती

Sun, 26 May 2024 03:17 AM IST
गोरखपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, देवरिया
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मुनाफा कमाने के चक्कर में कुछ धंधेबाज मानकों का नहीं रख रहे ख्याल
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। सुबह और शाम चाय के शौकीन हैं और खुली चायपत्ती का प्रयोग कर रहे हैं तो विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में धंधेबाज बाजार में केमिकल युक्त चायपत्ती बेचने से भी गुरेज नहीं कर रहे हैं। यह आपकी सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है।
पूर्वांचल में नेपाल से सटे बहराइच व लखीमपुर खीरी से बड़ी मात्रा में बोरियों व प्लास्टिक की थैलियों में यहां मिलावटी चायपत्ती खपाई जा रही है। सस्ती जानकर घर में और अधिकतर चाय वाले इसका उपयोग कर रहे हैं।
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जिले में हर माह 10 से 15 लाख रुपये से अधिक की चायपत्ती का कारोबार होता है। शहर में ही छोटी-बड़ी मिलाकर कुल 10 दुकानें हैं। इसमें केवल खुली चायपत्ती का बाजार ही प्रतिमाह आठ लाख रुपये के करीब का है। 40 फीसदी खुली वाली ही बिकती है। मिलावटी चायपत्ती का कलर व स्वाद ऐसा है कि असली को भी मात देने में काफी है। पहले प्रयोग में लाई जा चुकी और लाल रंग के केमिकल मिली यह चायपत्ती लीवर के साथ ही शरीर के अन्य अंगों की कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकती है। फैशन व भेड़चाल के इस दौर में अब घर पर आए किसी मेहमान को शरबत, गुड़ या चीनी देने के बजाय चाय पिलाना अब स्टेटस सिंबल बन चुका है।
ऐसे में चायपत्ती को भी धंधेबाज जहरीला बनाने से नहीं चूक रहे हैं। अपने घर पर तो जांच परखकर या ब्रांडेड चायपत्ती का प्रयोग कर आप बच भी सकते हैं, लेकिन शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित चाय की दुकानों पर अधिकतर खुली चायपत्ती का ही प्रयोग हो रहा है। पिछले दिनों बस्ती में इसी तरह की एक क्विंटल चायपत्ती पकड़ी गई थी। इसके बाद टी बोर्ड ऑफ इंडिया ने इसकी जांच के आदेश जारी किए है। हालांकि, अभी जिले में कहीं भी जांच अभियान शुरू नहीं किया गया है।


कम दाम होने से होता है ज्यादा प्रयोग
बाजार में ब्रांडेड चायपत्ती के दाम 300 से 500 रुपये किलो तक हैं। जबकि खुली चायपत्तती
200 से 400 रुपये के बीच है। इसमें 200 से 250 रुपये किलो वाली सबसे ज्यादा डिमांड में है। साथ ही 300 रुपये वाली चायपत्ती 30 फीसदी, 400 रुपये किलो वाली 30 फीसदी ही इस्तेमाल करते हैं। 50 फीसदी लोग पैकेट वाली चायपत्ती का प्रयोग करते हैं।


सुझाव
खुली चायपत्ती ले रहे हैं तो हमेशा विश्वसनीय दुकान से ही लें
200 रुपये से नीचे वाली खुली चाय तो बिलकुल न लें
बारिश न होने के चलते अभी बंगाल व असम में से अच्छी क्वालिटी री चायपत्ती कम आ रही है। 15 दिन बाद बारिश होने के बाद अच्छी क्वालिटी के आने की संभावना है।

बोले व्यापारी
खुली चायपत्ती सिलीगुड़ी व गुवाहाटी से जिले में आती है। 300 से 400 रुपये प्रति किलो बिक रही है। खुली चायपत्ती पैकेट वाली से सस्ती ही होती है। ग्राहक हमेशा विश्वसनीय दुकान से ही खरीदें। शक होने पर उसकी गुणवत्ता की जांच अवश्य करा लें।

-राजू तिवारी, व्यापारी चायपत्ती


जिले के चायपत्ती बाजार में ब्रांडेड कंपनियों का ही कब्जा है। खुले में अब चायपत्ती लेना लोग कम पसंद कर रहे हैं, हालांकि, इसके बावजूद खुली चायपत्ती की दुकानों पर ग्राहकों का इंतजार किया जाता है। बाजार में मिलावटी चायपत्ती नहीं बेची जाती। कुछ धंधेबाजों के कारण अन्य व्यापारी बदनाम होते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
-रविप्रकाश, व्यापारी चायपत्ती


पिछले वित्तीय वर्ष में ही चायपत्ती के 26 नमूने लिए गए हैं। इसमें कई नमूने फेल हुए हैं। लाल रंग के केमिकल की मिलावट की पुष्टि संबंधित विक्रेता पर विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की गई है। विभाग की ओर से हर माह मिलावटी सामान के खिलाफ जांच अभियान चलाया जाता है।
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-विनय कुमार सहाय, सहायक आयुक्त खाद्य ग्रेड टू


मिलावटी चायपत्ती का सेवन स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक है। जानकारी के अभाव में इसका नियमित इस्तेमाल करने से कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। लीवर के साथ ही यह अन्य अंगों की कार्यक्षमता का प्रभावित कर सकता है। वैसे लैब में जांच के बाद ही केमिकल कंपोजिशन की रिपोर्ट आएगी, तब ही सही पता चलेगा कि वह शरीर के किस अंग को ज्यादा नुकसान पहुंचाएगी।
-डॉ. सिराजुद्दीन, फिजिशियन मेडिकल कॉलेज
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