प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग करता है खानापूर्ति
आशा कार्यकर्ताओं के नेटवर्क से चल रहे निजी अस्पताल
एक मरीज पर देते हैं तीन से पांच हजार रुपये का कमीशन
संवाद न्यूज एजेंसी
रुद्रपुर। प्रसूताओं की मौत के बाद चर्चा में आए अस्पताल संचालकों पर स्वास्थ्य विभाग की कार्रवाई महज दिखावा साबित हो रही है। अस्पताल सील होने के बाद प्रकरण मैनेज होते ही संचालक नए ठिकाने पर अस्पताल खोल देते हैं। चार साल में सील हुए सभी अस्पताल दोबारा चालू हो गए। संचालकों की मजबूत आशा कार्यकर्ताओं से नेटवर्क होने के कारण मरीज बुलाने में भी दिक्कत नहीं होती। बताया जाता है कि संचालक स्वास्थ्य विभाग में सक्रिय मरीज माफिया और आशा कार्यकर्ता को एक प्रसूता के ऑपरेशन पर तीन से पांच हजार रुपये कमीशन देते हैं।
नगर में प्रसूताओं की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर पहुंच कर तत्काल अस्पताल को सील कर देते हैं। शनिवार की रात जिस अस्पताल में प्रसूता की मौत हुई वह दो साल पहले सेमरौना पुल के दक्षिणी तरफ नरायनपुर रोड पर चल रहा था। विभाग के छापे के दौरान छह प्रसूता बेड पर पाई गई और उसने आशा कार्यकर्ता के सहयोग से पहुंचना बताया। इस पर अस्पताल को सील किया गया। कुछ दिन बाद संचालक ने नया ठिकाना बना लिया और पुल के उत्तरी तरफ मलह टोली वार्ड में निजी मकान में अस्पताल खोल दिया।
तीन साल पहले नगर के मरकड़ी ढाला पर स्वास्थ्य विभाग ने छापे के दौरान दो अस्पताल को कागजात ठीक नहीं होने के कारण सील कर दिया था। एक सप्ताह बाद फिर से दोनों अस्पताल चालू हो गए। दुग्धेश्वरनाथ मंदिर से पूर्वी बाईपास पर एक रसूखदार के अस्पताल को जिले की टीम ने डिग्रीधारी चिकित्सक नहीं होने पर नोटिस दिया। हालांकि अस्पताल अब संचालित है। प्रसूता की मौत के बाद कोतवाली से रामजी सहाय पीजी कॉलेज रोड पर स्थित अस्पताल को स्वास्थ्य महकमा ने सील तो किया, पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
अस्पताल को दोबारा भभौली चौराहे पर शिफ्ट कर दिया गया। कस्बे के बस स्टेशन स्थित दो अस्पताल और अल्ट्रा साउंड सेंटर को स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी सील कर चुके है, मगर वह बदस्तूर जारी है। नाबालिग को गलत तरीके से सुई लगाने के प्रकरण में चर्चा में आए मदनपुर कस्बा के एक बंगाली चिकित्सक की डिग्री फर्जी मिलने के बाद भी महज क्लीनिक सील करने की कार्रवाई की गई।
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सील अस्पताल से डीबीआर ले जाने की आशंका
सेमरौना पुल के उत्तरी तरफ स्थित अस्पताल में प्रसूता की मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अस्पताल के पंजीकरण को निलंबित कर दिया है। जबकि अस्पताल को सील कर दिया गया। साथ ही, जांच के लिए चार सदस्यीय टीम गठित कर दी गई। मोहल्ले वालों के अनुसार रविवार की रात एक सफेदपोश और अस्पताल के एक कर्मचारी के संरक्षण में कुछ लोग विवादित अस्पताल पर पहुंचे और अंदर दाखिल हुए। अस्पताल में लगे सीसीटीवी की डीबीआर और ऑपरेशन थियेटर में रखा सामान उठा ले जाने की आशंका व्यक्त की जा रही है।
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अस्पताल का पंजीकरण निलंबित कर दिया गया है। अस्पताल को सील किया गया है। अगर सील खोलकर डीबीआर व सामान हटाने की बात है तो उसे दिखवाऊंगा। जांच के लिए टीम गठित की गई है। रिपोर्ट आने पर कार्रवाई की जाएगी। अवैध रूप से चल रहे अस्पतालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. एसके सिन्हा, प्रभारी सीएमओ