देवरिया। भाटपाररानी थाना क्षेत्र के ओवरी देव निवासी दंपती के बीच 35 साल से चल रहे तीन मुकदमों में शनिवार को कोर्ट ने अहम फैसला सुनाया। अदालत ने पाया कि पति और पत्नी विधिक विवाहित नहीं हैं।
इससे दोनों पति-पत्नी नहीं है। पति ने पत्नी पर विवाह विच्छेद का मुकदमा दर्ज कराया तो पत्नी ने पति पर पहली पत्नी के रहते हुए दूसरी शादी करने का मुकदमा दर्ज कराया। पक्षकारों के बीच मुकदमेबाजी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा था। अपर प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय बृजेश मणि त्रिपाठी ने मामले की पहली सुनवाई के दिन ही देखा कि पक्षकारों के बीच मुकदमा वर्ष 1992 से चल रहा है।
उन्होंने पक्षकारों से जानना चाहा कि आखिर पत्रावली में बहस क्यों नहीं हुई है। नियमित सुनवाई के पश्चात अदालत ने पाया कि मामले का निपटारा पहले ही उच्च न्यायालय से किया जा चुका है, मगर पक्षकार एक-दूसरे को मात देने के लिए अनावश्यक मुकदमेबाजी कर रहे हैं। अदालत ने तीनों मुकदमों में निर्णय सुनाते हुए कहा कि पत्नी विधिक विवाहिता पत्नी नहीं है। संवाद