देवरिया। होली में अब कुछ हफ्ते शेष हैं। त्योहार को देखते मिलावटखोर जिलेभर में पूरी तरह सक्रिय हो गए हैं। पनीर, खोवा और मिठाई में मिलावट के बाद वह मिलावटी घी को शद्ध देशी घी बताकर बाजार में धड़ल्ले से बेच रहे हैं। उसमें एसेंस की कुछ बूंदे डाल दे रहे हैं। इससे वह शुद्ध देशी घी की तरह महकने लग रहा है। यह इतने कम दाम और शुद्ध देशी घी की खुशबू से खरीदने वाले इसे खरीद भी रहे हैं। पहले यह मिलावटी कारोबार कुछ ही दुकानों में चल रहा था, लेकिन जिले में दो से ढाई टन देशी घी की खपत को देखते हुए मुनाफाखोर इसमें मिलावट करके खूब पैसा कमा रहे हैं। वहीं इस घी का सेवन करने से इसमें वसा की मात्रा अधिक होने से लीवर खराब होने लगता है और पाचन तंत्र कमजोर होने लगता है। हर्ट अटैक का भी खतरा बढ़ जाता है।
मिलावटी घी पॉम ऑयल, डालडा और देशी घी के एसेंस से तैयार हो रहा है। देशी घी की खुशबू के लिए इसमें प्रोक्लीन ग्लाइकोन नामक केमिकल डाला जाता है। यह केमिकल बहुत सस्ता होता है। प्रोक्लीन ग्लाइकोन नामक केमिकल का एसेंस मिलाते हैं कि असली घी की महक भी इसके सामने कम पड़ जाती है। आम आदमी इसे नहीं पकड़ नहीं पाता। शहर में ही नहीं जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में भी कुछ किराने की दुकानों पर मिलावटी देशी घी सस्ते में मिल जाता है। 100 से डेढ़ सौ रुपये में तैयार हो जाने वाला यह घी फुटकर में 500 से 600 रुपये किलो डिब्बे और पैकेट में बिकता है।
मिठाई की दुकानों पर होती है ज्यादा खपत
मिठाई की दुकानों पर मिठाई बनाने के लिए मिलावटी देशी घी की ज्यादा खपत होती है। शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में देशी घी की दो से ढाई टन की खपत है। मिलावटी देशी घी जिले में गोरखपुर से आता है। गोरखपुर में यह शाहजहांपुर और कानपुर से आता है। यहां के कुछ थोक व्यापारी इसे मंगाते हैं। फिर इसे तहसीलों और ग्रामीण इलाकाें में सप्लाई करते हैं। मिठाई की दुकान वाले इस मिलावटी घी का प्रयोग करके तरह तरह की मिठाइयां बनाते है। आसपास के लोग इसे शुद्ध देशी घी में बना हुआ समझ कर खरीदते हैं।
इस तरह करें असली और नकली घी की पहचान
असली घी को अगर आप गर्म करेंगे तो वह पिघल कर भूरे रंग का हो जाएगा। वहीं मिलावटी घी का रंग पीला नजर आता है। इसके अलावा असली देसी घी बहुत जल्दी पिघल जाता है। वहीं मिलावटी घी को पिघलने में ज्यादा समय लगता है। नीचे कुछ अवशेष रह जाएगा। एक तरीका यह भी है कि एक कप में पानी लें और उसमें एक चम्मच घी डालें। अगर घी ऊपर तैरता है तो वह असली है। अगर घी नीचे बैठ जाता है तो वह नकली है।
10 किलो दूध से एक किलो बनता है घी
पशुपालक विकास यादव ने बताया कि पहली प्रक्रिया के तहत 10 किलो भैंस का दूध को एकत्रित किया जाता है। इसे दूध से दही में बदला जाता है। दही की मोटी परत को गर्म करने पर एक किलो शुद्ध घी निकलता है। 40 से 50 रुपए किलो के हिसाब से 10 किलो दूध का भाव 400 से 500 रुपए से कम हो ही नहीं सकता है। वहीं दूसरी प्रक्रिया के तहत 20 लीटर भैंस के दूध से डेढ़ किलो क्रीम निकलता है। इसके बाद इससे 800 से 900 ग्राम शुद्ध देशी घी निकलता है। ऊपर से मेहनत अलग। कुल लागत निकाल लिया जाए तो एक किलो देशी घी की कीमत करीब 1200 रुपये किलो की होगी। वहीं मार्केट में मिलावटी देशी घी को शुद्ध देशी घी बताकर मुनाफाखोर इसे 500 से 600 रुपये किलो बेच रहे हैं।
लीवर हो सकता है खराब, हार्ट अटैक का खतरा
सीएमएस डा. एचके मिश्रा ने बताया कि नकली घी सीधा लीवर को खराब करता है। नकली घी खाने से पाचन क्रिया प्रभावित होती है। वसा की मात्रा ज्यादा होने से हर्ट अटैक का खतरा ज्यादा बढ़ जाता है। पॉम ऑयल से कब्ज और एसीडीटी तत्काल करता है। रोज इस्तेमाल से पेट दर्द और अल्सर होता है।