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ओमान से शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम

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मृतक मनोज का शव गांव पहंचने पर कई थाने की पहुंची पुलिस। - फोटो : DEORIA
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ओमान से शव गांव पहुंचते ही मचा कोहराम
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एक माह पूर्व हुई संदिग्ध परिस्थितियों में हुई थी मौत
खुखुंदू के छठियांव गांव का मामला पोस्टमार्टम की जिद पर अड़े थे परिजन,
संवाद न्यूज एजेंसी
खुखुंदू। थाना क्षेत्र के छठियांव गांव निवासी 28 वर्षीय एक युवक की तकरीबन एक माह पूर्व ओमान में मौत हो गई। घटना के बाद परिजन शव का इंतजार कर रहे थे। सोमवार की देर रात को शव गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों ने पांच लोगों पर हत्या का आरोप लगाते हुए शव को दरवाजे पर रख पोस्टमार्टम कराए जाने की मांग कर करने लगे। पुलिस के घंटों मान मनौव्वल के बाद परिजन दाह संस्कार के लिए तैयार हुए।
छठियांव गांव निवासी रामनरायण कुशवाहा का इकलौता बेटा मनोज कुमार कुशवाहा (28) दो साल से ओमान में रहता था। वह घर आया था। पांच-छह महीने पूर्व वह फिर से ओमान गया। तीन मई को घर पर उसकी मौत की सूचना मिली। तबसे परिजन शव मंगाने के लिए डीएम और जनप्रतिनिधियों से गुहार लगा रहे थे। उनकी पहल पर सोमवार की देर रात को शव गांव पहुंचा। मंगलवार की सुबह परिजन और गांववाले शव को दरवाजे पर रखकर पोस्टमार्टम कराने की मांग करने लगे। परिजनों का कहना है कि मनोज ने मरने से पहले फर्म के पांच लोगों पर जान से मारने का आरोप लगाते हुए अप्रैल में मैसेज करते हुए लिखा था कि आज हमारा आखिरी दिन है।
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...सीओ सहित गांव में पहुंची थी चार थानों की फोर्स
खुखुंदू। छठियांव गांव में मंगलवार को मनोज का शव रखकर जब परिजन और गांववाले हत्या का आरोप लगाते हुए पोस्टमार्टम की जिद करने लगे तो। कुछ ही देर में सीओ सलेमपुर, लार, सलेमपुर और भलुअनी थानेदार मयफोर्स मौके पर पहुंच गए।
साइड स्टोरी
बुढ़ापे की लाठी गई, मां-बाप की इकलौता पुत्र था मनोज
अब परिवार के सामने दो जून की रोजी रोटी का भी संकट
विनय कुमार राय
खुखुंदू। पाल पोसकर बेटे को कमाने योग्य बनाया। जब बुढ़ापा आया और बेटे ने कमाना शुरू किया तो अल्प समय में ही काल के गाल में समा गया। तकरीबन पांच-छह माह पूर्व ओमान के लिए घर से निकले मनोज के बूढे़ मां-बाप को क्या पता था कि इस बार उनका लाल हमेशा के लिए घर छोड़कर चला जाएगा। बेटे की मौत के गम में बदहवास मां चारपाई पर पड़ी थी तो पिता दरवाजे पर एकटक बेटे के शव की तरफ निहार रहे थे। यह दृश्य देखकर हर किसी की आंखें नम हो जा रही थीं।
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रामनरायण कुशवाहा की चार संतानों में तीसरे नंबर का इकलौता बेटा मनोज था। दो बेटियों के बाद जब घर में बेटा पैदा हुआ तो पिता रामनरायण कुशवाहा और मां शुगांति देवी को मानों दुनिया की सारी खुशियां मिल गईं थीं। दो साल पहले मनोज ओमान कमाने गया। इसके बाद वह बीच में घर आया था। तकरीबन पांच-छह महीने पहले ही वह ओमान गया था। वह घर का इकलौता चिराग और मां-बाप के बुढ़ापे का सहारा था। ईश्वर ने अल्प समय में ही मां-बाप का सहारा छीन लिया। मनोज की ढाई साल की एक बच्ची है।
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