-रेलवे स्टेशन पर कभी रात में आने से कांपते थे लोग, अब शाम को रेलवे स्टेशन की छटा देखने आ रहें
- दो प्लेटफाॅर्म और चार रेल लाइन से जगमगा रहा रेलवे स्टेशन
संवाद न्यूज एजेंसी
सलेमपुर। पिवकोल रेलवे स्टेशन कभी सुनसान हुआ करता था। जहां रात में आने में लोग कांपते थे। आज रेल लाइनों का जाल बिछ रहा है। प्लेटफार्म की संख्या एक से बढ़ कर दो हो गईं है, जबकि चार रेल लाइन बनकर तैयार है। पिवकोल रेलवे स्टेशन के हो रहे कायाकल्प से इलाका जगमग हो रहा है। वहीं अनुआपार और पिवकोल गांव के पास अंडर पास तथा अनुआपार से पिवकोल समपार संख्या चार तक रेल लाइन के पूरब दिशा में सड़क का निमार्ण कार्य शुरू कर दिया गया है। यह देख क्षेत्र के लोगों में विकास की एक नई उम्मीद जग गई है।
एक ऐसा समय था, जब ट्रेन भटनी व सलेमपुर से निकलती थी और पिवकोल स्टेशन कब पार हो जाता था यात्रियों को पता ही नहीं चल पाता था। रात में पैसेंजर ट्रेन से क्षेत्र के लोग टार्च या मोबाइल की बत्ती जला कर नीचे उतरते थे। एक वर्ष में पिवकोल रेलवे स्टेशन ऐसा बदल गया कि अब रात में रेलवे स्टेशन लाइट से जगमगा रहा है। एक प्लेटफार्म से दूसरे प्लेटफार्म पर जाने के लिए फुट ओवर ब्रिज बन चुका है। पिवकोल गांव के पास अंडर पास का निर्माण जल्द शुरू हो जाएगा। इसके लिए रेलवे ने पत्र जारी कर दिया है। काफी दिनों से अनुआपार ढाला की मांग चल रही थी, लेकिन कुछ तकनीकी अड़चन के चलते अनुआपार ढाला नहीं बन सका। इसको लेकर क्षेत्र के लोगों में मायूसी थी।
इसी बीच रेलवे ने लोगों की समस्या को देखते हुए अनुआपार ढाला से रेलवे लाइन के पूर्वी छोर से संपर्क संख्या चार तक सीसी निर्माण बनाने का निर्णय लिया। रेलवे ने कच्ची सड़क का निर्माण कर दिया गया है। उम्मीद है कि अगले महीने में सीसी रोड का कार्य शुरू कर दिया जाएगा। वहीं सलेमपुर बाईपास अनुआपार ढाला होकर ही गुजर रहा है जिसके चलते अनुआपार ढाला के पास अंडर पास बनाया जाएगा। इससे न केवल पिवकोल क्षेत्र का विकास होगा बल्कि सलेमपुर - भटनी के रास्ते बिहार जाने के लिए राहगीरों को काफी सहूलियत मिलेगी।
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क्या कहते हैं क्षेत्रीय लोग
- जब हम छोटे थे तो देखे थे कि पिवकोल स्टेशन पर शाम होते ही कोई रुकता नहीं था। उस वक्त लोग अपने आपको असुरक्षित महसूस कर रहे थे। आज वही स्टेशन है, जहां शाम को लोग नजारा देखने के लिए आ रहे हैं। रेलवे स्टेशन का जो विकास किया जा रहा है वह सिर्फ स्टेशन का नहीं हो रहा बल्कि क्षेत्र के तमाम पिछड़े गांवों का हो रहा है। आने वाले समय में पिवकोल भी एक रोजगार का हब होगा।
-वीर बहादुर कुशवाहाग्राम प्रधान अनुआपार
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- दो साल पूर्व जब हम लोग सलेमपुर से पैसेंजर ट्रेन पड़कर रात में पिवकोल रेलवे स्टेशन पर उतरते थे, तो इतना अंधेरा रहता था कि लोग चोटिल हो जाते थे। लोगों को टार्च या मोबाइल का सहरा लेना पड़ता था। आज रेलवे स्टेशन लाइट से जगमगा रहा है।
-नंदलाल मिश्राहरिश्चंद्र कोड़रा
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- तहसील का सबसे पिछड़ा क्षेत्र पिवकोल को मना जाता था, लेकिन केंद्र सरकार जिस प्रकार पिछड़े क्षेत्रों को विकसित करने में जुटी हुई है। उससे निश्चित ही क्षेत्र को लोगों को लाभ मिलेगा और लोग रोजगार के क्षेत्र में भी आगे बढ़ेंगे।
-फखरे आलमग्राम प्रधान बढ़पुरवा