देवरिया। डाकघरों में किसान विकास पत्रों की बिक्री फिर से शुरू होने जा रही है। महकमे ने इसके लिए तैयारी शुरू कर दी है। विभागीय जिम्मेदारों की बातों पर गौर करें तो महानिदेशक के आदेश पर जल्द ही इसकी बिक्री होने लगेगी।
केंद्र सरकार ने एक दिसंबर 2011 को किसान विकास पत्र की बिक्री बंद कर दी थी। उसकी जगह राष्ट्रीय बचत पत्र लांच किया गया था। जिसे खरीदने में लोगों की रुचि कम देखी गई। सरकार एक बार फिर किसान विकास पत्रों को डाकघरों के जरिए बेचने की कवायद शुरू की है। महानिदेशक डाक कावेरी बनर्जी ने मातहतों को पत्र लिखकर किसान विकास पत्र की बिक्री शुरू करने के बारे में जानकारी दी है।
एनएससी खरीदने में नहीं है रुचि
विभागीय लोगों का कहना है कि राष्ट्रीय बचत पत्र में इन्वेस्ट न करने की सबसे बड़ी वजह परिपक्वता का लंबा समय है। इसे पांच वर्ष बाद ही तोड़ा जा सकता है, लेकिन किसान विकास पत्र की महज ढाई वर्ष बाद ही मेच्योरिटी हो जाती है। इसलिए एनएससी में इन्वेस्ट करने में लोगों की रुचि काफी कम रही। इसकी वजह से इसका आकर्षण कम होता गया।
पांच लाख की बिक रही एनएससी
राष्ट्रीय बचत पत्र की बिक्री अपेक्षा से काफी कम है। प्रधान डाकघर से प्रतिदिन महज पांच लाख रुपये का एनएससी जारी किया जा रहा है, लेकिन किसान विकास पत्र के प्रति लोगों का आकर्षण अधिक था। उस वक्त प्रतिदिन 20 लाख रुपये धनराशि का केवीपी जारी होता था।
चार प्रकार का होगा केवीपी
किसान विकास पत्र चार तरह का होगा। डाक विभाग ने एक हजार, पांच हजार, 10 हजार और 50 हजार रुपये निर्धारित किया है।