रुद्रपुर/ एकौना। नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने से रुद्रपुर में बाढ़ की स्थिति भयावह होती जा रही है। सोमवार को दोआबा और कछार क्षेत्र में दोनों नदियों राप्ती और गोर्रा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा था। इनके खतरे का निशान 70.50 मीटर है। गोर्रा का जलस्तर 70 मीटर पर पहुंच चुका है जबकि राप्ती नदी 69.50 मीटर पर बह रही है। दोनों नदियां तेजी से लाल निशान की ओर बढ़ रही है।
दो दिन से पिड़रा-भुसउल बांध पर गोर्रा नदी का कटान और तेज हो गया है। यहां तीन मीटर बांध कट कर नदी में विलीन हो चुका है। सिंचाई विभाग बांध बचाने को बांध के नीचे पेड़ों की डाल और नायलान कैरेट डाल रहे हैं। नदी का वेग रोकने को दो दिनों से प्रयास के बाद भी कटान नहीं रुक रहा है। सिंचाई विभाग के एसडीओ जगधारी राम और अवर अभियंता रमायन पांडेय कटान स्थल पर कैंप कर रहे हैं। नेपाल के पानी से उफनाई नदी कई जगह पर दबाव बना रही है। राप्ती नदी माझा नरायन, हड़हा और करहकोल बंधे पर दबाव बना रही है। वहीं भेड़ी गांव में भी कटान का खतरा बना हुआ है। इधर, गोर्रा नदी के तट पर बसे गांव पिड़रा, करनपुर, ईश्वरपुरा में भी कटान का खतरा बना है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने से नरायनपुर और बहोरादलपतपुर गांव में मकानों पर खतरा मंडरा है। इन गांवों की दो दर्जन मकान नदी में विलीन हो चुके हैं। बाढ़ के खतरे को लेकर प्रशासन चौकन्ना है। तहसीलदार दयाशंकर पाठक बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगातार नदियों का स्थिति का जायजा लेकर डीएम को भेज रहे हैं।
घाघरा खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर
बरहज। घाघरा और राप्ती नदी के जलस्तर में लगातार वृद्धि जारी रहने से बाढ़ का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। घाघरा नदी खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर प्रवाहित हो रही है। नदी पार के गांव विशुनपुर देवार के सभी सोलह टोल मैरुंड हो गए हैं। बाढ़ का पानी मऊ जनपद की सीमा नुरुल्लाहपुर बंधे तक पहुंच गया है। सोमवार की सुबह भदिला प्रथम और कुंदममहाल धनया गांव भी राप्ती के पानी से घिर गया। नगर के गौरा वार्ड में स्थित प्राचीन हजरत मलंग शाह बाबा की मजार पर घाघरा तेजी से कटान कर रही है। मजार का दक्षिणी हिस्सा नदी में विलीन हो गया है। परसिया देवार में साधु की मड़ई के पास टूटी पुलिया की मरम्मत नहीं होने से आवागमन बाधित है।
सोमवार को थानाघाट पर बने मापक के अनुसार घाघरा खतरे के निशान 66.50 मीटर से ऊपर 67.25 मीटर पर प्रवाहित हो रही है। नदी खतरे के निशान से 75 सेंटीमीटर ऊपर प्रवाहित हो रही है। गत 24 घंटे में नदी के जलस्तर में 25 सेंटीमीटर की वृद्धि मापी गई है। घाघरा और राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ता ही जा रहा है। विशुनपुर देवार के सभी 16 टोले मैरुंड हो गए हैं। बाढ़ का पानी नुरुल्लाहपुर बंधे से टकरा रहा है। सोमवार की सुबह भदिला प्रथम और कुंदमहाल धनया गांव के लोग जब जगे तो गांव को चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा पाया। लोग गांव में ही घिरे हुए हैं। प्रशासन ने नाव का प्रबंध किया है। सबसे अधिक मुसीबत नगर के गौरा वार्ड में है। यहां प्राचीन हजरत मलंग शाह बाबा की मजार को नदी निगलने को आतुर है। हिंदू-मुस्लिम एकता का प्रतीक मजार को बचाने का प्रशासन ने कोई प्रयास नहीं किया है। परसिया कूरह में भी नदी तेजी से कटान कर रही है। एसडीएम शैलेंद्र कुमार ने बताया कि बाढ़ से घिरे गांवों के लोगों को नाव उपलब्ध कराई गई है। प्रशासन सतर्क है।
बंधों की दशा बताने को शिवपाल से खोखा सिंह
रुद्रपुर। पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह उर्फ खोखा सिंह सोमवार को पिड़रा-भुसउल बांध पर पिड़री में हो रहे कटान का निरीक्षण करने पहुंचे। कटान स्थल पर बंधे की दयनीय दशा को देखकर उनकी पीड़ा साफ झलक रही थी।
1998 की बाढ़ के बाद राप्ती, गोर्रा और बथुआ नदी पर 130 किलोमीटर बांध का निर्माण और उसकी सोलिंग खोखा सिंह ने कराई थी। पूर्व विधायक ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों में जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा से एक बार फिर कछार और दोआबा के लोगों पर बाढ़ का संकट मंडरा रहा है। उन्होंने बंधो की दयनीय दशा के लिए पूर्ववर्ती सरकार के प्रतिनिधियों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने रुद्रपुर के बाढ़ प्रभावित इलाके में कटान की संवेदनशीलता और बंधों की दयनीय दशा को लेकर सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव से मुलाकात करने के लिए कहा। कहा कि मुलायम सरकार में रुद्रपुर क्षेत्र में बंधों के निर्माण, सोलिंग और मुआवजे के लिए 100 करोड़ रुपये खर्च किए गए। बंधों का निर्माण हो जाने से 2002 के बाद इस क्षेत्र मे बाढ़ नहीं आई। कहा कि रुद्रपुर में बाढ़ कि स्थिति भयावह होती जा रही है। बसपा शासन काल से सिंचाई विभाग की कई परियोजनाएं लटकी हैं। इन परियोजनाओं को शासन से स्वीकृत कराकर जनता को राहत देने का काम किया जाएगा।