सलेमपुर। गन्ना किसानों का बकाया का भुगतान नहीं होने से इस बार भी इनकी होली फीकी रहेगी। चीनी मिल के मनमानेपन से किसानों का इस सत्र का बकाया 56 करोड़ रुपये अधर में लटका है। मायूस किसानों ने अमर उजाला रिपोर्टर से अपना दर्द साझा किए। किसानों के दबाव को देखते हुए डीएम ने चीनी मिल के जीएम को अविलंब भुगतान के लिए पत्र लिखा है। हाड़तोड़ मेहनत के बाद किसान अपना गन्ना प्रतापपुर चीनी मिल को दे रहे हैं। लेकिन भुगतान के मामले में चीनी मिल फिसड्डी साबित हो रही है। गन्ना मूल्य भुगतान नहीं होने से अधिकांश किसान कर्ज के बोझ तले दबे हुए हैं। इस दुर्व्यवस्था से क्षुब्ध होकर जिले के अधिकांश किसान गन्ना खेती से तौबा करने का मन बना रहे हैं। इस सत्र में जिले के किसानों ने चीनी मिल को 15 दिसंबर से तीन मार्च तक 20.96 लाख क्विंटल गन्ना दे चुके हैं। लेकिन मिल प्रबंधन के तरफ से सिर्फ 22 दिसंबर तक यानी महज सात दिन का भुगतान 5.37 करोड़ रुपया किसानों को की है। मिल प्रबंधन के पास इस सत्र का किसानों का 56 करोड़ रुपया बाकी चल रहा है। भटनी परिक्षेत्र के गन्ना विकास परिषद के चेयरमैन त्रिभुवन प्रताप सिंह का कहना है कि इस सत्र में मेरा करीब सवा दो लाख रुपया गन्ना मूल्य का बकाया है। कौशल किशोर सिंह, तेजबहादुर सिंह, सोनू सिंह, अवध नारायण मिश्र, संतोष शाही का तीन से चार लाख रुपया भुगतान अटका है। किसानों का कहना है कि बकाया गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं होने से घर से लेकर बाहर तक काफी परेशानी है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर गन्ना मूल्य का भुगतान इस महीने में मिल प्रबंधन नहीं करता है तो किसी भी हद पर किसान उतर सकते हैं। इस बाबत जिला गन्ना अधिकारी खुशीराम ने बताया कि डीएम साहब की ओर से बकाया गन्ना मूल्य भुगतान के लिए मिल के जीएम को पत्र लिखा गया है। 15 को मार्च को इसी को लेकर मीटिंग होने वाली है। इसमें कुछ समाधान निकलने की संभावना है।