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जाली नोटों को लेकर प्रशासन गंभीर नहीं

Sun, 22 Dec 2013 05:43 AM IST
Deoria
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देवरिया। जाली नोटों के कारोबार पर अंकुश लगाने के लिए प्रदेश के कई जिले रुचि नहीं दिखा रहे हैं। लिहाजा उन जिलों में पांच वर्ष बाद भी जिलास्तरीय समिति गठित हो पाई और ना ही बैठकें आयोजित कर स्थानीय स्तर पर कोई उपाय किए गए। ऐसे जिलों की सूची में देवरिया भी शामिल हैं। आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ की ओर से इस आशय का पत्र एसएसपी/एसपी और डीएम को भेजे गए हैं।
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प्रदेश के कई जिलों में जाली नोटों की बरामदगी और तस्करों के पकड़े जाने के कई मामले सामने आए थे। विशेषकर अंतर्राज्यीय सीमा पर इस तरह के मामले पकड़े गए थे। इसे देखते हुए जाली नोटों के कारोबार पर अंकुश लगाने और समन्वय स्थापित करने के लिए गृह मंत्रालय ने 2008 में राज्यस्तरीय और जिलास्तरीय समिति गठित करने का निर्देश दिया गया था। ताकि जाली नोटों के छापने, संचालन आदि मामलों की निगरानी और समीक्षा हो सके। साथ ही इनके प्रसार को रोकने/नियंत्रण के लिए प्रभावी उपायों पर चर्चा पर समन्वय स्थापित हो सके। इसके लिए राज्यस्तर पर डीजीपी की अध्यक्षता में गठित कर ली गई। पर कई जिलों ने इस आदेश की अनदेखी कर दी। इस पर आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन लखनऊ के एएसपी ने इन जिलों के एसएसपी/एसपी और डीएम को पत्र लिखकर समिति के गठन करने का अनुरोध किया है। समिति की बैठक तीन महीने में एक बार करनी होगी।
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