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ऐसे भोजन से तो बीमार हो जाएंगी प्रसूूताएं

Fri, 29 Nov 2013 05:41 AM IST
Deoria
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सीएचसी सलेमपुर में पांच घंटे बाद ही छोड़ दिया जाता है जच्चा बच्चा कोसलेमपुर। होटल का पानी वाली दाल, रोटी और सब्जी खाने से प्रसूताएं स्वस्थ्य होने के बजाय बीमार हो जाएगी। स्वास्थ्यकर्मियों की मिलीभगत से यह खेल सीएचसी में करीब चार माह से चल रहा है। सब कुछ जानने के बाद भी जिम्मेदार खामोश हैं। प्रसव के मात्र पांच घंटा बाद ही प्रसूताओं को छोड़ दिया जाता है। जबकि बीएसटी रजिस्ट्रर में 24 से 30 घंटे तक भर्ती रहने की बात लिखी जाती है। लेकिन 48 घंटा बाद ही प्रसूूताओं को डिस्चार्ज करने का नियम है। सीएचसी में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम का मखौल स्टॉफ नर्स और कर्मचारियों की ओर से उड़ाया जा रहा है। कार्यक्रम के नोडल बनाए गए डॉ. उमेश चंद्र को प्रसूताओं के भर्ती होने व छोड़ने का टाइम तक नहीं मालूम है। भर्ती से लेकर प्रसूताओं को छोड़ने तक का काम स्टॉफ नर्सों के जिम्मे है। गुरुवार को अमर उजाला रिपोर्ट के पहुंचने पर स्टॉफ नर्स आनन-फानन में बीटीएस रजिस्टर पर मरीजों के डिस्चार्ज होने का समय भरा।
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बुधवार को दिन में 12.15 बजे बरसीपार गांव की रहने वाली श्रीकांती देवी पत्नी जयराम प्रसाद अस्पताल में भर्ती हुईं। 1.44 बजे प्रसव हुआ। प्रसव होने के पांच घंटा बाद उसे छोड़ दिया गया। भोजन तो दूर की बात है एक कप चाय भी उसे नहीं दी गई। जबकि बीएसटी रजिस्टर में गुरुवार को सुबह आठ बजे मरीज को डिस्चार्ज किया गया।
जयराम कौड़िया गांव निवासी चंद्रावती पत्नी मदन प्रसाद का प्रसव बुधवार को 7.30 बजे प्रसव हुआ। तीन बजे तक न ही नाश्ता मिला और ना ही भोजन। घरवालों को अपने पास से सब कुछ करना पड़ा। शाम को उसे छोड़ दिया गया। लेकिन बीटीएस रजिस्टर में गुरुवार को प्रसूता को डिस्चार्ज होना दर्शाया गया। भीमपुर गांव निवासी सुमित्रा पत्नी देवेंद्र गुप्ता का प्रसव बुधवार की शाम 6.42 बजे सीएचसी में हुआ। उसी रात करीब 10 बजे उसे डिस्चार्ज भी कर दिया गया और बीटीएस रजिस्टर में गुरुवार को दोपहर में डिस्चार्ज होने का समय भरा गया। इसके अलावा छपरा प्रयागपुर गांव के शशि देवी पत्नी अमिताभ, संगीता देवी, जमुई के शबाना आदि प्रसूताओं के साथ ऐेसा स्टॉफ नर्सों ने किया है। रामपुर गांव निवासी पिंकी देवी पत्नी जितेन्द्र का प्रसव गुरुवार को सुबह हुआ।
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लेेकिन प्रसूता को ठेकेदार चाय तक नहीं दिया। दोपहर में अस्पताल पहुंचे रिपोर्टर से प्रसूता के घरवाले बताए कि सिर्फ नाम के सरकारी अस्पताल है। सभी दवा भी बाहर से खरीदनी पड़ी है। स्टॉफ नर्स के कक्ष में एक झोले में होटल से रखा हुआ भोजन एक व्यक्ति पत्तल में निकाला और प्रसूता को ले जाकर देने लगा।
भोजन देखने के बाद प्रसूताओं ने खाने से इंकार कर दिया। पूछने पर मालूम हुआ कि प्रसूताओं के हिसाब से होटल से भोजन लाकर ठेकेदार देता है। नाश्ता, दूध, चाय और फल तो प्रसूताओं को मिलना दूर की बात है।
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