लार/सलेमपुर। छठ पर्व के खरना के दिन पौ फटते ही जब तीनों व्यवसायियों की हादसे में मौत की खबर उनके गांव पहुंची तो पर्व की तैयारियों में जुटीं महिलाओं के पैरों तले से जमीन ही खिसक गई। उपेंद्र, दिनेश और लंगड़ की मां उनकी दीर्घायु के लिए कोसी भरने की तैयारियों में जुटीं थीं। जमालपुर और राजपुर में इनकी मौत से कोहराम मच गया।
बिहार में छठ उल्लास के साथ मनाया जाता है। एक सप्ताह पूर्व से ही लोग छठ के वेदी तैयार करने और घाट बनाने में जुट जाते हैं। उपेन्द्र, दिनेश और लंगड़ के घर की महिलाएं तीनों की दीर्घायु के लिए कोसी भरने तैयारी की थीं। इनकी मां शनिवार को पुत्रों की लंबी उम्र के लिए भगवान सूर्य की उपासना की तैयारी संजोई थीं। घर वालों को क्या पता था कि रास्ते में मौत बनकर काल तीनों का इंतजार कर रहा था। राजपुर निवासी लंगड़ जमालपुर के रहने वाले दिनेश का रिश्तेदार है। हर वर्ष लंगड़ खुद अरघा का सामान आंधर बाजार में लाता था। इस वर्ष दिनेश और उपेन्द्र को साथ लेकर मधुबन बाजार से खरीदारी करने गया था। शाम सात बजे राजेश की मालवाहक गाड़ी से तीनों व्यवसायी सामान लेकर आंधर बाजार के लिए रवाना हुए थे। दिनेश के चार पुत्र हैं। उपेन्द्र की कोई औलाद नहीं थी। उसकी पिछले वर्ष शादी हुई थी। जिस घर से आज छठ की डाली मंगल गीतों के साथ छठ घाट के लिए निकलनी थी। उस घर से दाह संस्कार के लिए शव यात्रा निकलेगी।
तीन घंटे बाद पहुंची लार पुलिस
लार। रामजानकी मार्ग पर पर कोहरा सुतावर इंटर कॉलेज के पास हुई दुर्घटना में मारे गए तीनों व्यवसायियों और घायल चालक तीन बजे भोर तक लावारिस हालत में सड़क पर पड़े थे। जाड़े का रात होने से गांव वालों को भी दुर्घटना की जानकारी नहीं हो सकी। तीन घंटे बाद पहुंची मेहरौना चौकी पुलिस ने शव और मालवाहक कोे कब्जे में लिया। बेहोश चालक को सीएचसी में भर्ती कराया गया। लोगों का कहना है कि रात में गश्त करने वाली पुलिस आखिर कहां थी कि तीन घंटे बाद शव के पास पहुंची।
घर के अकेले कमाऊ सदस्य थे मृतक
लार। तीनों व्यवसायी घर के अकेले कमाऊ सदस्य थे। मिल-जुलकर तीनों एक साथ सीजन और त्योहार के हिसाब से व्यवसाय किया करते थे। इनकी मौत के बाद बच्चों और परिवार वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।