देवरिया। अंशकालिक अनुदेशक पद के एक आवेदक ने आवेदन-पत्र निरस्त होने पर हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट ने सचिव शिक्षा अनुभाग को प्रकरण का निस्तारण करने का आदेश दिया। सचिव ने ई-आवेदन पत्र में बीपीएड परीक्षा में प्राप्त अंकों के गलत अंकित करने पर शासनादेश में त्रुटि सुधार के संबंध में कोई व्यवस्था नहीं होने पर निरस्त कर दिया।
बरियारपुर निवासी राजेश कुमार ने अंशकालिक अनुदेशक पद पर ई-आवेदन किया। ई-आवेदन-पत्र में बीपीएड परीक्षा में प्राप्तांक 955/1300 के स्थान पर 473/500 अंकित किया गया था। काउंसिलिंग के दौरान जांच में यह पाया गया कि ई-आवेदन पत्र में बीपीएड परीक्षा में 473/500 प्राप्तांक/पूर्णांक के स्थान पर मूल शैक्षिक अंकपत्र में 955/1300 प्राप्तांक/पूर्णांक है। ई-आवेदन पत्र और मूल शैक्षिक स्नातक अंकपत्र में भिन्नता पाए जाए जाने पर जिला चयन समिति ने निरस्त कर दिया। इस मामले में राजेश ने हाईकोर्ट की शरण ली। याची ने कोर्ट से सहानुभूति पूर्वक विचार करने का अनुरोध किया था। कोर्ट ने सचिव शिक्षा अनुभाग-5 को मामले के निस्तारण का आदेश 30 जुलाई को दिया। सचिव नीतीश्वर कुमार ने रिट याचिका राजेश बनाम उप्र राज्य व अन्य का 30 अक्टूबर को आवेदन निरस्त कर निस्तारण कर दिया। उनकी तरफ से संयुक्त सचिव ममता श्रीवास्तव ने इसकी सूचना रजिस्ट्रार उच्च न्यायालय इलाहाबाद, बीएसए देवरिया, याची समेत अन्य संबंधित को पत्र भेजकर अवगत कराया है।