बरहज। जैसे मीरा को श्याम की लगन लगी और श्याम के रंग में रंग गईं। उसी प्रकार बरियारपुर भड़सरा निवासी इकबाल अहमद को राम की ऐसी लगन लगी की इकबाल से बन गए रामशरणदास। पिछले दो दशक से राम नाम की धुनी जमाये हुए हैं। हिंदू मुस्लिम एकता की मिसाल रामशरण का कहना है सभी धर्म मानवता का संदेश देते हैं। राम नाम वह मंत्र है जिससे जीवन, जीव, जीवात्मा सब पवित्र हो जाते हैं। जब इकबाल राम नाम की चादर ओढ़ रामकथा का रसपान कराते हैं तो लोग आनंद से झूम उठते हैं।
करुअना के रुच्चापार मंदिर पर कथा कहने आये रामशरण दास बताते हैं कि हाईस्कूल से एमए तक की शिक्षा इकबाल अहमद के नाम से है। बचपन से ही हमारा झुकाव राम की तरफ हो गया। गांव के लोग कीर्तन तथा धार्मिक कार्यों में हमें बुलाते थे। धर्म की धुरी धारण करना एक जनम की बात नहीं है। अहिल्यापुर मंदिर पर श्रीपति मिश्र मुझको बुला कर कहते थे कि राम कथा कहो। जब मंदिर पर दर्शन को आते थे तो लोग रामकथा कहने को कहते थे। जब मैं राम कथा कहने लगा तो सामने बड़ी कठिनाई आई। हिंदू भाई कहते थे कि यह मुसलमान है और मुसलमान भाई क हते थे कि खुदा को छोड़ राम नाम जपता है। दोनों लोग स्वीकार नहीं करते थे। परमात्मा की प्राप्ति के लिए भाव की प्रधानता है, क्रिया की प्रधानता नहीं है। घरवालों ने जब कह दिया कि इस घर में स्थान नहीं तब महराजगंज के सोहगीबरवां में गोपला देवी के मंदिर में अपना निवास बनाया हूं। जहां लोग मुझे बुलाते है वहां पहुंच श्रीराम कथा का संगीतमयी सुनाता हूं।