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घघ्ारा डेंजर लेवल से 80 सेंटीमीटर ऊपर पहुंची

Tue, 16 Jul 2013 05:33 AM IST
Deoria
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बरहज। घाघरा के पानी में लगातार बढ़त जारी है। इसके चलते बाढ़ का पानी देवारा क्षेत्र सहित नगर के निचले इलाकों तेजी से फैल रहा है। नदी का दबाव रामजानकी मार्ग पर भी है। इसके चलते मार्ग के नीचे किसानों की फसलें डूब रहीं हैं। प्रशासन की ओर से बाढ़ बचाव एवं राहत नहीं मिलने से पीड़ितों में नाराजगी बढ़ने लगी है। गौरा में हजरत मलंग शाह बाबा और रामपुर में देईमाता मंदिर कटान की जद में होने से खतरे में है।
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थानाघाट पर बने जल मापक पर सोमवार की शाम घाघरा का जलस्तर 67.30 पर पहुंच गया, जो डेंजर लेवल से 80 सेमी ऊपर है। पानी में बढ़त के चलते देवारा क्षेत्र के प्रभावित परसिया देवार के बंधा व विशुनपुर देवार के सभी टोले पानी से घिरे हुए हैं। बंधों पर भी पानी का दबाव तो बना ही है कई जगहों पर ओवरफ्लो हो रहा है। परसिया कूरह, कपरवार संगम तट पर कटान से घर और जमीन नदी में विलीन हो रही है। भदिला प्रथम और कुंदमहाल धनया गांव भी बाढ़ के पानी से घिरे होने यहां के लोगों को आवश्यक सामानों के लिए मुसीबतें झेलनी पड़ रही है। मेहियवा और रगरगंज के बीच रामजानकी मार्ग पर घाघरा दबाव बनाये हुए है। मार्ग को बचाने के लिए बनाये गए सभी ठोकर पानी से डूब गए हैं। यहां निचले हिस्से में किसानों की बोई फसलें डूब गई हैं। रामपुर गांव में मंदिर के पास नदी कटान कर रही है। आशंका है कि मंदिर कभी भी नदी में समाहित हो सकता है। गौरा हजरतमलंग शाह बाबा का मजार भी कटान से खतरे की जद में है। एसडीएम रामानुज सिंह ने बताया कि बाढ़ चौकियां पूरी तरह सक्रिय है।
बचाव के लिए सिर्फ कोरा आश्वासन
बरहज। जिला प्रशासन ने कोशिश की होती तो परसिया कूरह गांव के अस्तित्व पर खतरा नहीं आता। गांव के लोग तहसील स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक नदी के कटान को रोकने की शिकायत कर चुके हैं। लेकिन प्रशासन आज तक मूकदर्शक बना हुआ है। कोरे आश्वासन देकर गांव वालों को गुमराह किया जा रहा है। कटान रोकने के लिए कोई ठोस उपाय आज तक नहीं कि ये जा सके हैं। छह वर्षों से लगातार हो रहे कटान से अब तक 112 परिवारों के घर और कृषि योग्य सैकड़ाें एकड़ भूमि नदी में समाहित हो गयी है।
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वर्ष 2007 से ही परसिया कूरह गांव में घाघरा नदी का कटान कर रही है। सत्ता में बैठे लोगों के साथ प्रशासन के लोग तो मौके पर जाकर कटान स्थल का निरीक्षण करते हैं। कटान रोकने के लिए गांववालाें को बाकायदा दलीलें भी देते हैं कि इसके लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ी जाएगी। केंद्र और राज्य सरकार को इसके लिए लिखा जाएगा। इनके आश्वासन कोरे ही साबित हुए है। बर्बादी को झेल रहे रविंद्र मिश्र और सुरेश मिश्र का कहना है कि नेता हो या प्रशासनिक अधिकारी सभी गांव आते हैं और देखकर चले जाते हैं। डीएम ने बताया कि बचाव कार्य की योजना के सर्वे के लिए पटना से गंगा बाढ़ बचाव परियोजना की टीम को पत्र लिखा गया है।
जलस्तर थमा लेकिन खतरा बरकरार
रुद्रपुर। गोर्रा और राप्ती नदियाें के उफान में सोमवार को ठहराव तो रहा पर बंधाें पर खतरा बना हुआ है। संवेदनशील स्थानाें पर नदियाें की कटान बदस्तूर जारी है। पिड़रा करनपुर बांध को बचाने का सिंचाई विभाग का प्रयास विफल साबित हो रहा है। गोर्रा नदी बांध को रुक रुक कर काट रही है। दो दिन से विभाग के अधिकारी बंधे को बचाने के लिए प्रयासरत हैं।
गोर्रा नदी लाल निशान और राप्ती नदी के खतरे के निशान से 30 सेमी नीचे बह रही है। रविवार की सुबह पिड़रा करनपुर बांध कटने के बाद सिंचाई विभाग बांध को बचाने के लिए पूरा जोर लगा रहा है, पर कटान रुक नहीं रहा। यहां पूर्व में पेड़ की टहनियाें को काट बंधे को सुरक्षित बताया जा रहा था, पर कटान शुरू होने के बाद बाढ़ विभाग की बोलती बंद हो गई है। विभाग के अवर अभियंता रमायन पांडेय, सुरेमन चौधरी और सुनील यादव दिन रात बंधे पर काम कराने पर जुटे हैं।
कहा कि विभाग बंधे को बचाने का पूरा प्रयास कर रहा है, हवा के झाेंकों से पानी की लहरें बंधे पर सीधे टकरा कर कटान कर रही हैं। नारायनपुर और बहोरादलपतपुर में नदी के तट पर बसे लोगाें ने मकानाें से सामान को बाहर निकाल दिया है। यहां दो दर्जन मकान कभी भी नदी में गिर सकते हैं।
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