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एक साथ तीन शव देख कोहराम, रो पड़ा जवार

Sat, 25 May 2013 05:30 AM IST
Deoria
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सलेमपुर। दिल दहला देनी वाली एक साथ तीन मौत की खबर ने इलाके के लोगों को हिला कर रख दिया। शुक्रवार के भोर से ही सुभाष यादव के दरवाजे पर लोगों की भीड़ जुटने लगी। घर के अंदर से महिलाओं की सिसकियां और रुक-रुककर चीखने चिल्लाने की आवाज गांव में पसरे सन्नाटे को तोड़ रही थी। सुबह करीब पौने आठ बजे तीनों शव वाहन से चुरिया गांव पहुंचा तो महिलाएं चीत्कार उठीं। गमगीन माहौल को देख गांव जवार के लोग भी रो पड़े।
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सुभाष अपनी इकलौती बेटी अंजू की तिलक चढ़ाने खुखुंदू थानाक्षेत्र के अघैला गांव जा रहे थे। नूनखार रेलवे स्टेशन के पूर्वी समपार फाटक पार करते समय जिस गाड़ी से वह लोग जा रहे थे वह इंरसिटी एक्सप्रेस की चपेट में आ गई। वाहन में चालक सहित कुल आठ लोग सवार थे। जिसमें अंजू के पिता सुभाष, सीआरपीएफ जवान विजय और क्रेन ऑपरेटर लक्ष्मण यादव की दर्दनाक मौत हो गयी। जबकि रामनाथ यादव, बादशाह सिंह और कैलाश घायल हो गये। रामनाथ की हालत गंभीर बताई जा रही है। उनका उपचार पीजीआई में चल रहा है। एक साथ तीन लोगों की मौत खबर सुनकर लोगों का दिल दहल उठा। शुक्रवार को भोर से ही मृतकाें के दरवाजे पर जवार के लोगों व रिश्तेदारों की भारी भीड़ जुट गयी। घर के अंदर से रुक-रुककर आ रही सिसकियां सन्नाटे को चीर रही थीं। डीसीएम पर लदे तीन शव गांव पहुंचते ही सैकड़ों की संख्या में महिलाएं और पुरुष दरवाजे की तरफ दौड़ पड़े। हर तरफ चीख और चीत्कार सुनाई पड़ रही थी।
शहनाई से पहले आया मौत का मंजर
शादी की तैयारियां लगभग पूरी हो गयीं थीं। इकलौती बहन की शादी में फौजी छोटा भाई भी छुट्टी लेकर कुछ दिनों से घर आया हुआ था। 28 मई को अंजू की शादी की शहनाई बजने वाली थी। यह भगवान को मंजूर नहीं था। मौत के रूप में नूनखार रेलवे स्टेशन के पूर्वी ढाला पर इंतजार कर रहा काल के क्रूर पंजे ने सदा के लिए तीन जिंदगियों को निगल लिया और खुशी पर मातम का बादल छा गया।
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चुरिया घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
सुभाष और लक्ष्मण की शवयात्रा 10 मिनट के अंतराल पर घाघरा नदी के चुरिया घाट पर पहुंची। गांव के अलावा आधा दर्जन अन्य गांव के लोगाें की भीड़ घाट पर जुटी थी। चिता में आग लगते ही सबकी आंखें नम हो गयीं। सभी के चेहरे पर खामोशी नजर आ रही थी। सीआरपीएफ जवान विजय यादव का शव ले जाने की तैयारी चल रही थी कि अचानक सीआरपीएफ कमांडेंट का फोन आया और शव को यह कह कहकर रोक दिया गया कि हम लोगों के आने के बाद अंतिम संस्कार होगा।
मौत के मुंह में धकेल चालक हुआ फरार
लक्ष्मण मुंबई में क्रेन ऑपरेटर और अपने घर का मुखिया भी था। अपने छोटे भाई बलिन्द्र की शादी 12 मई को धूम-धाम से की थी। शादी की खुशी का खुमार अभी परिवार के लोगों से उतरा नहीं था कि गम का पहाड़ टूट पड़ा। लक्ष्मण के दो पुत्री और दो पुत्र हैं। शव पहुंचने के बाद लक्ष्मण की बड़ी बेटी रो-रोकर चालक रविंद्र यादव को कोस रही थी। वह कह रही थी सब कर जनवा लेके भाग गइलअ हो रविंद्र चाचा...। जबकि मृतक का सबसे छोटा पुत्र पांच वर्षीय ऋषभ पापा के लिए रो रहा था।
ए पापा कहां गइलअ...
लार। पत्नी की मौत के बाद सुभाष यादव अपनी इकलौती लाडली बेटी अंजू को मां के न रहने का कभी एहसास नहीं होने दिए। पिता होने के साथ-साथ मां का भी प्यार अंजू को देते थे। दरवाजे पर शव पहुंचते ही घर की महिलाएं बदहवाश हो गईं और शव से जाकर लिपट गयीं। पापा हो कहा गइलअ... कहकर अंजू बेहोश हो जा रही थी। इसे देख सारे लोग सिसकने लगे।
सुभाष के के तीन औलादाें में से सबसे छोटी अंजू है। सुभाष घर पर रहकर खेती करते थे। उनका बड़ा बेटा मन्नू भी उसके सहयोग में लगा रहता था। जबकि दूसरा पुत्र गौतम सेना में है। सबसे छोटी पुत्री होने के नाते और अंजू सबकी लाडली थी। कमउम्र में ही भगवान ने सुभाष की पत्नी तो अंजू के सिर से मां का साया छीन लिया। खेती किसानी में व्यस्त होने के बावजूद उसके पिता उसे मां का भी प्यार देते थे। सुभाष का इरादा था कि लाडली बेटी की शादी किसी नौकरी वाले लड़के से किया जाए कि उसे कोई कमी न हो। यही सोचकर उन्होंने यूपीपी में सिपाही से शादी तय की। अंजू भी अपने मन में तरह-तरह के सपने सजोकर बैठी थी। अंजू को क्या पता था कि पिता मेरा हाथ पीला करने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह देंगे। महिलाओं की बदहवासी देख आंखों में आंसू लिये लोग एक दूसरे कां ढांढस बंधाते हुए महिलाओं को संभालने में लगे थे।
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