बरियारपुर। इरशाद अहमद मुस्लिम हैं, लेकिन नवरात्र में उपवास रखते हैं। मां दुर्गा की प्रतिमा रखकर सांप्रदायिक सद्भाव की दुआ मांगते हैं। वह होली-दीपावली के साथ ईद, बकरीद, मुहर्रम भी पूरी आस्था के साथ मनाते हैं। कई वर्षों से हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल बने इरशाद अहमद से दोनों धर्म के लोगों का खासा लगाव है। जाति-धर्म के नाम पर आस्तीनें चढ़ाने वालों के लिए इरशाद नजीर हैं। रामपुर कारखाना ब्लॉक के महुआपाटन निवासी इरशाद अहमद महुआपाटन घाट चौराहे पर जनरल स्टोर की दुकान से जीविकोपार्जन करते हैं। महुआपाटन चौराहे पर वर्ष 2010 में दशहरे पर दुर्गा प्रतिमा को लेकर विवाद हो गया। अगले वर्ष नवरात्र में चौराहे पर दुर्गा मां की प्रतिमा कोई नहीं रख रहा था तो इरशाद अहमद आगे आए। अपने खर्चे से नवरात्र के एक दिन पहले मां की प्रतिमा लाकर रखी। प्रथम दिन उपवास रखकर मां का पूजन किया। नवरात्र के नौंवे दिन कन्याओं का भोजन कराकर हिंदू-मुस्लिम एकता की मिसाल पेश की। उसके बाद से वह हर वर्ष नवरात्र में महुआपाटन चौराहे पर दुर्गा मां की प्रतिमा रखकर पूजा-पाठ करते हैं। हर रोज हरि नाम प्रभात फेरी में कीर्तन गाते हैं। मंदिर में जाकर पूजा करते हैं। इरशाद बताते हैं कि राम-रहीम में कोई अंतर नहीं है, हम दोनों को मानते हैं। बचपन से ही दशहरे को देखते हुए मेरे मन में मां दुर्गा के प्रति श्रद्धा भाव पैदा हुआ। 2011 से मां दुर्गा की प्रतिमा रख रहा हूं। इस बार भी चौराहे को झालर से सजाते हुए दुर्गा मां की प्रतिमा रखेंगे। व्रत के साथ मूर्ति विसर्जन के दिन कन्याभोज कराना है।