देवरिया। जिला पंचायत में समितियों के गठन के लिए सोमवार को आयोजित बैठक में अजब नजारा दिखा। सलेमपुर सांसद और चार विधायक बैठक शुरू करने के लिए ढाई घंटे तक डीएम का इंतजार करते रहे। डीएम आए तो फिर बस पांच मिनट में ही गठन की औपचारिकता निभाकर बैठक खत्म कर दी गई। न कोई चर्चा हुई और न ही विरोध-आपत्ति। हालांकि बैठक खत्म होने के बाद कई सदस्यों ने इस पर आपत्ति जताते हुए गठन को असंवैधानिक करार दिया। उनका कहना था कि बैठक 11 बजे से शुरू होना था, घंटों इंतजार के बाद जैसे ही विपक्षी सदस्य हटे, आनन-फानन में प्रशासन ने गठन की कार्रवाई पूरी कर ली। उन्होंने आंदोलन की भी बात कही है।
जिला पंचायत के विभिन्न कार्यों को संपन्न कराने के लिए गठित छह समितियों का पुनर्गठन होना था। इसके लिए सोमवार को सुबह 11 बजे से जिला पंचायत सभागार में बैठक बुलाई गई थी। सुबह से ही काफी फोर्स परिसर में डटी रही। बैठक में जिला पंचायत सदस्यों के अलावा विभिन्न ब्लॉकों के प्रमुख और सांसद-विधायक भी आमंत्रित थे। सलेमपुर सांसद रवींद्र कुशवाहा, विधायक काली प्रसाद, सदर विधायक जन्मेजय सिंह, बरहज के सुरेश तिवारी, रामपुर कारखाना के कमलेश शुक्ल सहित अन्य जिला पंचायत सदस्य व ब्लॉक प्रमुख तय समय से बैठक में उपस्थित हो गए थे, मगर प्रशासक डीएम अमित किशोर नहीं पहुंचे। सदस्य उनका इंतजार करते रहे। दो घंटे तक इंतजार के बाद भी डीएम नहीं आए तो एक-एक कर सदस्य सभागार से बाहर निकलकर घूमने लगे। इस बीच कई बार डीएम से फोन पर संपर्क की भी कोशिश हुई तो हर बार शीघ्र आने का हवाला दिया जाता रहा। करीब डेढ़ बजे अचानक डीएम जिला पंचायत पहुंचे। उनके आते ही एएमए उमेश चंद पटेल ने बैठक की कार्यवाही शुरू कराई। समितियों के गठन प्रस्ताव रखा, जिसे उपस्थित सदस्यों ने ध्वनिमत से पारित करते हुए डीएम की ओर से नामित कमेटी पर सहमति जता दी गई। कुल पांच मिनट की इस कार्यवाही के बाद डीएम ने बैठक समाप्ति की घोषणा कर दी।
इन समितियों का हुआ गठन
जिला पंचायत में प्रशासनिक समिति, नियोजन समिति, शिक्षा समिति का सभापति पदेन अध्यक्ष को बनाया गया है। इसके अलावा निर्माण समिति के सभापति परवेज आलम, जल प्रबंधन समिति के सभापति अशोक यादव, स्वास्थ्य एवं कल्याण समिति के सभापति ओमप्रकाश तिवारी को नियुक्त किया गया है। प्रत्येक समिति में नौ-नौ सदस्य शामिल किए गए हैं।
27 सदस्यों ने कहा, गठन नियम विरुद्ध
समितियों के गठन की कार्यवाही के दौरान सदन में मौन रखने वाले सदस्यों ने बैठक खत्म होते ही इसे असंवैधानिक करार दिया है। 27 सदस्यों ने हस्ताक्षरयुक्त पत्र डीएम को सौंपकर अपना विरोध दर्ज कराया। इस पत्र पर कई ऐसे लोगों के भी दस्तखत थे, जो बैठक में मौजूद रहे। सदन में वह पूरी तरह चुप्पी साधे रहे। इन सदस्यों की अगुवाई कर रहे ओमप्रकाश तिवारी का कहना था कि बैठक सुबह 11 बजे से होनी थी। तय समय पर अधिकांश सदस्य उपस्थित थे, लेकिन जान बूझकर इसे टाला जाता रहा। ढाई घंटे बाद डेढ़ बजे डीएम तब पहुंचे, जब विपक्ष के सदस्य इंतजार से आजिज होकर सभागार से बाहर निकल आए थे। उनके लौटने तक में जल्दी-जल्दी कार्यवाही पूरी कर बैठक समाप्त कर दी गई। सत्ताधारी दल के प्रभाव में सारी प्रक्रिया नियमविरुद्ध ढंग से की गई है। अगर इसे रद्द नहीं किया गया तो आंदोलन होगा। ज्ञापन देने वाले सदस्यों में रंभा देवी, लाल बहादुर सिंह, अनिरुद्ध कुशवाहा, रिंकू यादव, उपेंद्र, वीरेंद्र सिंह, रागिनी सिंह, सत्यदेव, बुद्धदेव, संतोष यादव, सरोज देवी, रामविचारे, मुन्ना आचार्य, धर्मदेव यादव, प्रीति जायसवाल, नीमा सिंह यादव, दुलारी देवी, जितेंद्र शर्मा,, शुभावती देवी आदि रहे।