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एक का उजड़ा सुहाग दो की सूनी हुई कोख

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अयोध्या चौरसिया
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पैकौली। रामप्रवेश उर्फ कोहली की हत्या से दिव्यांग पत्नी सदमे में है। भाभी ऊषा देवी की चित्कार से लोगों की आंखें नम हो जा रही थी। ट्रिपल मर्डर के बाद गम और गुस्से के बीच सड़क पर मौजूद सरौरा गांव की महिलाएं प्रशासन को कोस रही थीं।
सदर कोतवाली के सरौरा गांव के हनुमान मंदिर के पास पेट्रोल पंप निर्माण को लेकर चल रहे विवाद का मामला डेढ़ माह पुराना है। प्रशासन का दावा है कि पेट्रोल पंप मालिक को निर्माण कराने के लिए उसके पक्ष में आदेश दिया गया था। उसी आधार पर वह शनिवार को निर्माण कार्य कराने के लिए आए थे। गांववाले पहले की तरह इस बार भी काम रोकने की कोशिश की, लेकिन किसी को यह अंदेशा नहीं था कि तीन की हत्या हो जाएगी। रामप्रवेश तीन भाइयों में तीसरे नंबर का था। दस साल पहले दिव्यांग पम्मी से कोर्ट मैरिज की थी। एक बेटा शिवम, बेटी अंजली, रिंकी और पिंकी है। रामप्रवेश के दोनों भाई बाहर नौकरी करते हैं। रामप्रवेश घर पर मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता था। हमलावरों की गोलियों का शिकार हुआ इंद्रजीत कुशवाहा तीन भाइयों में छोटा था। अहमदाबाद में एक प्राइवेट कंपनी में नौकरी करता था। कुछ दिन पहले घर आया था और दीवाली बाद अहमदाबाद जाना था, लेकिन भगवान को कुछ और ही मंजूर था। इंद्रजीत की मौत से मां सुभावती देवी का रोते-रोते बुरा हाल हो गया था।
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गोली की जवाब में गांववालों ने किया पथराव
पैकौली। गोली चलने के बाद सरौरा गांव के लोग उग्र हो गए। ताबड़तोड़ चौराहे की दुकानें बंद हो गए। जवाब में गांववालों ने पथराव किया। लेकिन असलहाधारी हमलावर रुद्रपुर की ओर वाहनों में सवार हो भाग गए। ईट से पूरा सड़क पट गया।
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