देवरिया/सोनूघाट। समाज कल्याण विभाग की मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत रविवार को राजकीय आईटीआई सोंदा परिसर में सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 86 जोड़े परिणय सूत्र में बंधे। इनमें 80 हिंदू जोड़ों का विवाह और छह मुस्लिम जोड़ों का निकाह कराया गया। कार्यक्रम में अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने नवविवाहित जोड़ों को सुखद एवं सफल वैवाहिक जीवन की शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम में मुख्य विकास अधिकारी राजेश कुमार, उप जिलाधिकारी देवरिया, जिला विकास अधिकारी सुशील कुमार सिंह, तहसीलदार सदर अलका सिंह, ब्लॉक प्रमुख सदर पवन गुप्ता, सांसद सलेमपुर के प्रतिनिधि रामप्रकाश यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला पिछड़ा वर्ग कल्याण अधिकारी, जिला पूर्ति अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी कुशीनगर, जिला समाज कल्याण अधिकारी देवरिया, अनुसूचित मोर्चा के जिलाध्यक्ष राजन सोनकर और नायब तहसीलदार देवरिया सहित अन्य अधिकारी व जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। शहर के गणमान्य नागरिकों ने भी कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
अतिथियों ने नवविवाहित जोड़ों को आशीर्वाद देते हुए उनके सुखद दांपत्य जीवन की कामना की। कार्यक्रम के दौरान नवविवाहित जोड़ों को योजना के तहत निर्धारित उपहार सामग्री भी दी गई।
हिंदू विद्वानों ने भाद्रपद में विवाह को बताया निषेध
सामूहिक विवाह कार्यक्रम को लेकर कुछ हिंदू विद्वानों ने भाद्रपद मास में विवाह के आयोजन पर आपत्ति जताई है। श्री बैकुंठनाथ पवहारी संस्कृत महाविद्यालय, बैकुंठपुर के पूर्व प्राचार्य युगुल किशोर तिवारी ने कहा कि हिंदू धर्मशास्त्र के अनुसार भाद्रपद मास में विवाह निषेध माना गया है। हालांकि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्वतंत्र है। ज्योतिषाचार्य मृत्युंजय कृष्ण शास्त्री ने बताया कि हरिशयनी एकादशी से भगवान विष्णु के शयन करने के कारण विवाह और अन्य मांगलिक कार्य निषेध माने जाते हैं। हरि प्रबोधिनी एकादशी तक विवाह एवं मांगलिक कार्यों का निषेध रहता है। उन्होंने भी कहा कि सरकार अपनी सुविधा के अनुसार कार्यक्रम आयोजित करने के लिए स्वतंत्र है।