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तब नीच जाति, अब अति पिछड़ा और गरीब

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देवरिया के रूद्रपुर में चुनावी जनसभा में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लोगों का अभिवादन स्वीकार किया। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। छह मई 2014 की तारीख। दिन था बुधवार। रुद्रपुर के सतासी इंटर कॉलेज में बतौर पीएम इन वेटिंग पहुंचे नरेंद्र मोदी ने 21 मिनट के संबोधन में जाति कार्ड के सहारे विपक्ष पर करारा हमला बोला था। उन्होंने खुद को ‘नीच जाति’ का बताया। अंतिम चरण के मतदान से ठीक पहले मोदी के इस बयान ने विरोधियों को चारों खाने चित कर दिया था। पांच साल छह दिन बाद मोदी ने फिर से वही दांव खेला है। इस बार खुद को अति पिछड़ी और गरीब जाति का बताते हुए मोदी ने पूर्वांचल के उन सभी जिलों के अति पिछड़े और गरीब वर्ग के लाखों मतदाताओं को साधा है, जहां अंतिम चरण में 19 मई को होना है।
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गोरखपुर मंडल की छह सीटों समेत घोसी, बलिया, गाजीपुर, चंदौली, वाराणसी, राबर्ट्सगंज, मिर्जापुर सीट पर अति पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की बड़ी तादाद है। मूल रूप से यह सपा-बसपा के कॉडर वोट माने जाते रहे हैं। इन्हीं वोटों के बल पर गठबंधन जीत के दावे भी करता रहा है। अब खुद को अति पिछड़ा बताकर मोदी ने इस वर्ग से तो रिश्ता जोड़ा ही सामान्य, ओबीसी सहित हर श्रेणी के गरीबों को रिझाने से नहीं चूके। मोदी की रवानगी के बाद सभास्थल से बाहर आते हर जुबां पर यही चर्चा थी। सिर पर गमछा, नंगे पांव, मैले-कुचैले कपड़ों में लिपटे लोग मोदी की इस अदा के कायल दिखे। उनका कहना था कि मोदी भी तो गरीब ही थे। जब हर कोई जाति देख रहा है, तो फिर हम क्यों चूकें। उनसे बेहतर हमारा दर्द कौन समझेगा।

तब बाप-बेटा और बहन जी, अब बुआ-बबुआ
वर्ष 2014 के भाषण के दौरान मोदी के निशाने पर मुलायम-अखिलेश और मायावती थीं। तब उन्होंने इन्हें बाप-बेटा और बहन जी की सरकार का नाम लेकर निशाना साधा था। इस बार निशाने पर बुआ-बबुआ की जोड़ी थी। उन्होंने कई बार इस जोड़ी पर प्रहार किया। कहा कि 23 मई को एनडीए की सरकार बनने के बाद इनकी झूठी दोस्ती सच में शीशे की तरह चूर-चूर हो जाएगी। बबुआ के गुंडे बुआ के कार्यकर्ताओं को पीटेंगे।
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25 साल तक सत्ता में रहने के दिए संकेत
रुद्रपुर में सभा के दौरान पीएम मोदी ने भविष्य के सशक्त और मजबूत भारत का विजन दिखाया। उन्होंने इशारों में अगले 20-25 साल तक सत्ता में कायम रहने के संकेत दिए। कहा कि मान लीजिए आज मेरा शरीर दौड़ रहा है, आप मुझे प्रधान सेवक बनाते जा रहे हैं। मगर 20-25 साल बाद मेरा शरीर भी तो कमजोर होगा और तब मैं छुट्टी लूंगा तो मुझे किराये का कमरा ढूंढना पड़ेगा। जो लोग मुझ पर सवाल उठाते हैं, उनकी संपत्ति से मेरी संपत्ति की तुलना कर लीजिए। उनके पास बड़े-बड़े बंगले हैं, वह करोड़ों के मालिक हैं। रिश्तेदार भी अरबों-खरबों वाले हैं, मगर मैं तो गरीब हूं। भगोड़े माल्या, एयर स्ट्राइक, अंतरिक्ष में सेटेलाइट के सफल परीक्षण जैसे कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि मजबूत सरकार से ही यह संभव हुआ। यह चुनाव बुलंद सरकार चुनने का है। आपको यह तय करना है कि 21वीं सदी में भारत का दुनिया में क्या स्थान होगा।
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