देवरिया। बाढ़ से बचाव के लिए हर साल लंबे-चौड़े सरकारी दावे होते हैं, मगर मानसून से पूर्व बांधों की मरम्मत व अन्य तैयारियों के प्रति न तो शासन गंभीर दिख रहा है और न ही विभाग। आलम यह है कि जिले में विभिन्न नदियों पर निर्मित 40 बांधों की मरम्मत के लिए 12 करोड़ रुपये की डिमांड भेजी गई थी। इसके सापेक्ष महज 70 लाख रुपये ही मिले हैं। ऊंट के मुंह में जीरा के समान इस धनराशि से होने वाली मरम्मत का क्या हाल होगा, इसे समझा जा सकता है। उधर, बजट का रोना रो रहे जिम्मेदार आधी-अधूरी तैयारियों के बीच बाढ़ से बचाव के उपाय करने का दावा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि यही हाल रहा तो इस साल भी तटवर्ती गांवों में बाढ़ से तबाही तय है।
जिले में बाढ़ से हर साल बड़े पैमाने पर जन-धन की हानि होती है। रुद्रपुर, बरहज, सलेमपुर और भाटपाररानी तहसील के गांवों में बाढ़ से हाहाकार मचता है। जिले में अब भी छोटी गंडक नदी के बंधों की मरम्मत कई वर्षों से नहीं हो सकी है। बारिश शुरू होने के बाद रेन कट और रैट होल भरने का काम किया जाता है। बाढ़ से पूर्व बंधों की मरम्मत के लिए सिंचाई विभाग के बाढ़ खंड की ओर से 12 करोड़ रुपये की मांग शासन से की गई थी, लेकिन इसके लिए महज 70 लाख रुपये जारी किए गए। लिहाजा मरम्मत का कार्य जोर नहीं पकड़ सका है। हालांकि दस्तावेजों में बाढ़ से बचाव की तैयारियों के माकूल इंतजाम कर लिए गए हैं। बाढ़ खंड के एक्सईएन कातिनीकांत राय का कहना है कि बाढ़ से बचाव की सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। बजट के हिसाब से जरूरी बंधों की मरम्मत और कटान को रोकने के इंतजाम किए जा रहे हैं। रुद्रपुर तहसील के भुसवल-पिड़रा और पिड़रा-करनपुर बंधे के पास बंबूक्रेक और कटर का काम शुरू करा दिया गया है। शासन से धन नहीं मिलने के कारण मरम्मत में दिक्कतें आ रही हैं।
जिले में प्रवाहित होती हैं चार नदियां
जिले में गोर्रा, राप्ती, घाघरा और छोटी गंडक नदियां बहती हैं। रुद्रपुर और बरहज तहसील क्षेत्र के कई गांव दो नदियों के बीच में बसे हैं। यहां की भौगोलिक स्थिति ऐसी है कि हर साल इन गांवों में बाढ़ से तबाही तय मानी जाती है। बरहज में कुर्रह परसिया गांव नदी में विलीन हो गया और सैकड़ों लोगों की गृहस्थी उजड़ गई।
40 तटबंधों में 13 अति संवेदनशील
जिले के चार नदियों से जुड़े 40 बंधे हैं। इसमें विशुनपुर-भागलपुर, नकईल-सेमरौना, पांडेय माझा-जोगिया, जिरासो-बड़का गांव, तिघरा-मराछी, नगवां-छपरा, भुसवल-पिड़रा, पिड़रा-करनपुबर, छित्तपुर-देवसिया, पचलड़ी, तुर्तीपार-चुरिया, बरसीपार-पयासी, मदनपुर-केवटलिया, हेतिमपुर-परसाखाड़ तटबंध अति संवेदनशील हैं। इन बंधों से करीब 25 तटवर्ती गांवों में बाढ़ का खतरा बना रहता है।
नौ जेई लगे, निगरानी के लिए बनीं 55 समितियां
40 बंधों की निगरानी नौ जेई के जिम्मे है। संख्या बल कम होने के कारण हर साल की तरह बाढ़ खंड ने 55 सुरक्षा समितियों का गठन किया है। समितियों में तटवर्ती गांव के जिम्मेदार लोगों को इसमें रखा गया है। नदियों में पानी का बढ़ना, कटान और बंधों की सुरक्षा को लेकर यह लोग सक्रिय रहेंगे और इसकी सूचना बाढ़ खंड को देते रहेंगे।
आज से बाढ़ बचाव की ड्यूटी शुरू
एक जून से बाढ़ से बचाव के लिए अधिकारियों की ड्यूटी शुरू हो जाएगी। इसके लिए जिले में पिड़रा घाट और पिंडी में वायरलेस स्टेशन बनाए गए हैं। इसके अलावा बरहज, पिड़रा घाट, भेड़ी, नदावरघाट पर गेज स्थल बना है। अधिशासी अभियंता के आवास पर छह कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। जबकि बाढ़ नियंत्रण कक्ष के लिए तीन लोगों को रिजर्व में ड्यूटी लगी है।