सुनील कुमार सिंह
देवरिया। देश की रक्षा के लिए जान न्योछावर करने वाले आजाद अंसारी के घर में एंबुलेंस का किराया देने तक के लिए रुपये नहीं थे। खाला के बेटे अनवर ने रुपये का इंतजाम कर किराया दिया। इसके बाद चालक एंबुलेंस को लेकर वापस पुणे गया।
रामपुर कारखाना के हरखौली गांव के स्वर्गीय इंद्रीस अंसारी की माली हालत ठीक नहीं थी। जमीन भी नहीं के बराबर है। उनके चार बेटों में छोटा आजाद अंसारी सेना में भर्ती हुआ। वह संयुक्त परिवार की माली हालत को ठीक करने में लगा था, लेकिन नियति को यह मंजूर नहीं था। पिछले साल 16 सितंबर को वह ड्यूटी के दौरान श्रीनगर में पहाड़ से गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गया था। उपचार के दौरान परिवार के दो से तीन सदस्य उसके पास रहते थे। तमाम दवाइयां उनको बाहर से खरीदनी पड़ती थी। 31 अगस्त 2017 को जब आजाद अंसारी ने अंतिम सांस ली तो पार्थिव शरीर को निजी एंबुलेंस से घर लाया गया। एंबुलेंस का किराया 16400 रुपये हुए थे। परिवार के सदस्यों ने रुपये के बंदोबस्त की कोशिश की, लेकिन इंतजाम नहीं हो सके। हाटा के रहने वाले आजाद के खाला के बेटे अनवर ने रुपये का इंतजाम कर दिया। गांव और परिवार के लोगों का कहना था कि सेना की ओर से यदि मदद दी गई होती तो यह नौबत नहीं आती। पार्थिव शरीर के साथ आए सेना के जवानों ने एक सप्ताह में चेक के माध्यम से सहायता राशि देने की बात कही।