देवरिया। मानक को दरकिनार कर जिले में अवैध खनन करने वालों की जांच शुरू हो गई है। एक सप्ताह से जिले में सीबीआई टीम जमी हुई है। इससे खनन में शामिल जिम्मेदार घबराएं हुए हैं। जांच में पारदर्शिता बरती गई तो खनन माफिया के साथ-साथ कई अफसरों की गर्दन फंस सकती है।
सपा सरकार में अफसरों की सरपरस्ती में धड़ल्ले से मिट्टी और बालू का खनन होता था। इसमें सफेदपोश भी शामिल रहे। प्रदेश का निजाम बदलने के बाद खनन पर सख्ती बरती गई। शनिवार से देवरिया में सीबीआई टीम आई है। रविवार को सलेमपुर, बरहज, रुद्रपुर, भाटपाररानी और सदर तहसील के खनन स्थानों का निरीक्षण किया। साथ में खनन अधिकारी, संबंधित तहसील के तहसीलदार और लेखपाल राजस्व अभिलेख लेकर उपस्थित रहे। सीबीआई की जांच का केंद्र बिंदु बालू खनन घाट हैं। अफसरों की मानें तो भटनी और सदर तहसील में सर्वाधिक बालू का खनन हुआ है। इसमें कागज में नदी से बालू खनन करने का पट्टा जहां हुआ है, वहां के बजाए दूसरे स्थानों पर बालू का खनन कराया गया है। यही हाल सलेमपुर के नदावरघाट का भी है। सपा नेताओं के हनक के सामने चाह कर भी अफसर खनन पर रोक नहीं लगा पा रहे थे। सपा सरकार के पांच सालों के कार्यकाल में हुए अवैध खनन की जांच हो रही है। सीबीआई टीम खनन और राजस्व विभाग से एक-एक अभिलेख मांगाकर बारीकी से जांच कर रही है। सूत्रों की मानें तो अफसर सीबीआई टीम को अभिलेख उपलब्ध कराने में टाल-मटोल कर रहे हैं। इसकी वजह से जांच में समय लग रहा है। इस बाबत खनन अधिकारी उमाकांत ने बताया कि सीबीआई टीम जिले में कई दिनों से है। वे लोग गोपनीय तरीके से जिले में हुए खनन की जानकारी कर रहे हैं। उनके निर्देशानुसार कागजात उपलब्ध करा दिया जा रहा है।