जो देश की सुरक्षा के आधार, उनके अपनों का आधार अधर में
आधार कार्ड की गड़बड़ी के चलते स्वास्थ्य सुविधा से वंचित पूर्व सैनिक, नहीं बन पा रहा ईसीएचएस कार्ड, अस्थायी पर्ची पर हो रहा इलाज
अमर उजाला ब्यूरो
देवरिया। आज जब सारा देश भारतीय सेना और सैनिकों के पराक्रम की जय-जयकार कर रहा है। केंद्र हो या प्रदेश, सरकारें उन्हें हर सम्मान-सुविधा देने की बात करती हैं। ऐसे माहौल में इससे बड़ा दुर्भाग्य क्या होगा कि वे बहादुर जवान जिन्होंने कभी सीमा सुरक्षा की नींव बनकर देश की सेवा की, वे आज अपने परिवार के सदस्यों के आधार कार्ड की गड़बड़ी दूर कराने को परेशान हैं।
दरअसल, आधार कार्ड और सर्विस बुक में नाम और जन्मतिथि में अंतर के कारण करीब 1600 पूर्वसैनिक परिवारों का ईसीएचएस कार्ड नहीं बन पाया है। रिटायर्ड सैनिक परिवारों की संख्या जिले में करीब सात हजार है। भले अस्थायी स्लिप के सहारे इन्हें इलाज की सुविधा ईसीएचएस दे रहा है पर स्थायी व्यवस्था अधर में है। जिन बैंक शाखाओं में संशोधन की व्यवस्था की गई है, वे कोटा पूरा होने का हवाला देकर आधार अपडेट करने से मना कर रहे हैं। विभाग ने ईसीएचएस कार्ड अपडेट कराने की तिथि (31 दिसंबर18) बीत चुकी है। आधार कार्ड में सुधार नहीं हो पाने से ईसीएचएस कार्ड नहीं बन रहा है। जिम्मेदारों! सुन रहे हैं न आप?
ईसीएचएस कार्ड के लाभ
ईसीएचएस सैनिकों के अंशदान से चलाई जाने वाली सैनिक परिवारों के लिए विशेष स्वास्थ्य सेवा है। इसमें पूर्वसैनिकों के परिजनों का मुफ्त इलाज किया जाता है। मरीज को जिस दवा की जरूरत होती है अगर वह दवा अस्पताल में मौजूद नहीं है उसे ईसीएचएस की ओर से खरीदकर निशुल्क उपलब्ध कराया जाता है।
कोट
तमाम ऐसे पूर्वसैनिक हैं जिनके सर्विस बुक और आधार कार्ड में परिजनों के जन्मतिथि व नाम में अंतर है। उनका ईसीएचएस कार्ड नहीं बन पा रहा है। आधार में संशोधन नहीं किए जाने की शिकायतें वे कर रहे हैं। वंचित सैनिक परिवारों के लिए अस्थायी स्लिप दिए गए हैं ताकि उन्हें इलाज मिलता रहे।
-एपी पांडेय, इंचार्ज, ईसीएचएस, देवरिया।