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विशंभर बने केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार के अध्यक्ष

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जनपद थोक केन्द्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार के नव निर्वाचित अध्यक्ष विशम्भर मिश्र का लोगो ने स्वागत किया। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। जनपद थोक केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार लिमिटेड के चुनाव में भाजपा का परचम लहराया है। डायरेक्टर के पदों पर जीत के बाद बुधवार को हुए अध्यक्ष के चुनाव में भी पार्टी के विशंभर मिश्र निर्विरोध निर्वाचित हुए। राष्ट्रीय परिषद के सदस्य विशंभर मिश्र पार्टी के समर्पित कार्यकर्ता रहे हैं। यह जीत पार्टी के लिए संघर्षों का ही उन्हें इनाम माना जा रहा है।
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सहकारी भंडार के 13 में से 10 पर आपसी सहमति से निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। दो पदों के लिए मंगलवार को मतदान हुआ, जिसमें अरविंद कुमार और कांग्रेस समर्थित नीलिमा सिंह निर्वाचित हुईं। एक पर शासन की ओर से प्रतिनिधि नामित होने हैं। बुधवार को अध्यक्ष पद के लिए चुनाव को लेकर पूरे दिन गहमागहमी रही। भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. अंतर्यामी सिंह, सदर विधायक जन्मेजय सिंह, बरहज विधायक सुरेश तिवारी सुबह से ही निर्वाचन स्थल पर डेरा डाल चुके थे। भाजपा समर्थित उम्मीदवार के रूप में विशंभर मिश्र ने नामांकन दाखिल किया। तय समय सीमा दोपहर 12 बजे तक अन्य कोई नामांकन नहीं होने पार्टी ने राहत की सांस ली। उधर, उपाध्यक्ष पद के लिए कौशलेंद्र पांडेय व कांग्रेस की नीलिमा सिंह ने नामांकन किया। काफी उठापटक के बीच बाद में नीलिमा सिंह ने नामांकन वापस ले लिया। इस पद पर कौशलेंद्र भी निर्विरोध निर्वाचित हुए। चुनाव अधिकारी एडीएम वित्त सीताराम गुप्ता की ओर से परिणाम की घोषणा होते ही भाजपाई खुशी से झूम उठे। विजेता उम्मीदवारों को फूल-मालाओं से लाद दिया। एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर जीत की खुशियां बांटी। इस मौके पर पथरदेवा ब्लॉक प्रमुख सुब्रत शाही, विजय बहादुर दुबे, अजय दुबे, भूपेंद्र सिंह, नित्यानंद पांडेय, नीरज शाही, संजय तिवारी, राकेश शुक्ला आदि मौजूद रहे।

पहली परीक्षा में पास हुए अंतर्यामी सिंह
जिलाध्यक्ष चुने जाने के बाद जनपद थोक केंद्रीय उपभोक्ता सहकारी भंडार लिमिटेड के रूप में डॉ. अंतर्यामी के लिए पहला चुनाव था। इसमें पार्टी का परचम लहराने में वह कामयाब रहे। खास बात यह कि इस सीट पर न सिर्फ भाजपा की निर्विरोध जीत हुई, बल्कि विशंभर मिश्र के रूप में पार्टी के पुराने व समर्पित कार्यकर्ता को यह पद हासिल हुआ है। इस जीत के पीछे जिलाध्यक्ष की मेहनत व कुशल रणनीति को अहम कारण माना जा रहा है। बताते हैं कि विरोधी खेमे ने चुनाव में पूरी दमदारी दिखाने के लिए कमर कस लिया था, मगर डॉ. अंतर्यामी सिंह के रणनीति कौशल की बदौलत अध्यक्ष व उपाध्यक्ष के दोनों पदों पर निर्विरोध निर्वाचन की सहमति बन गई।
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