देवरिया। जागृति यात्रा के लिए 15 दिन एक ट्रेन में एक साथ गुजारने वाले युवाओं को न सिर्फ आठ हजार किलोमीटर के सफर में तरह-तरह के नए अनुभव मिले बल्कि पहले दिन परदेसी लगे सहयात्रियों के साथ ने अपनेपन के एक नए रिश्ते को भी जन्म दिया। अलग-अलग प्रांतों के युवाओं के बीच उनके रिहाइशी इलाकों से जुड़ी संस्कृतियों का आदान-प्रदान हुआ। इसके चलते जागृति यात्रा को लेकर निकली विशेष ट्रेन की हर बोगी अनेकता में एकता की झलक पेश करती नजर आई।
जागृति यात्रा के माध्यम से देश के विविध इलाकों के लोगों का ऐसा कुनबा जुड़ा कि 15 दिन के सफर में उन्हें अपनों की याद नहीं आई। इस बीच पहली बार मिले सहयात्रियों से परिवार और रिश्तेदारों जैसा प्रेमभाव विकसित हो गया। बोली, खानपान, पहनावे की विविधता एक-दूसरे को आकर्षित करने का माध्यम बन गई। चूंकि सभी के एक ट्रेन में जुटने के उद्यम को बढ़ावा देने का इकलौता मकसद था, लिहाज संवाद और विचार विनिमय में देर नहीं लगी। सफर के साथ संबंधों की मधुरता आगे बढ़ती गई और देखते ही देखते कुछ दिनों में 490 यात्रियों का आपसी सामंजस्य जागृति नामक नए कुनबे के रूप में नजर आने लगा। इस खास यात्रा की 10वीं वर्षगांठ पर ‘अमर उजाला’ मीडिया पार्टनर की भूमिका में है।
नतीजे में कारोबारी सूझ की साझेदारी के साथ-साथ यात्री के मूल निवास क्षेत्र की कमजोरियों पर चर्चा हुई। इन चर्चाओं में हर सूबे की सांस्कृतिक धरोहरों, आचार-व्यवहार का जिक्र भी आया। इससे युवाओं की इस टोली को कई शहरों और प्रदेश को देेखे बिना वहां की प्रमुख जानकारियों का परोक्ष अनुभव मिला। इससे क्षेत्र विशेष में खास तरह के उद्यम को विकसित करने की संभावनाओं पर कुछ ठोस निष्कर्ष भी निकले।