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बदइंतजामी का शिकार हुआ पौराणिक महत्व का मंदिर

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सुरेंद्र वत्स
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रुद्रपुर। सदियों पुराना दुग्धेश्वरनाथ के पौराणिक महत्व का मंदिर बदइंतजामी के कारण पहचान खोता जा रहा है। यहां आठवीं सदी के इतिहास पर काल का ग्रहण लगा है। मंदिर में स्थापित खुदाई में प्राप्त बेशकीमती काले पत्थर की मूर्तियों की सुरक्षा खतरे में पड़ी है।
दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में अपार आस्था रखने वाले गोरक्षपीठाधीश्वर और सीएम योगी आदित्यनाथ से मंदिर के महंत रमाशंकर भारती ने मंदिर के जीर्णोद्धार की गुहार लगाई है। उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर मंदिर के उत्थान के लिए किए गए वादों को याद दिलाया है। गोरक्षनाथ पीठ का दुग्धेश्वरनाथ पीठ रुद्रपुर से वर्षों पुराना नाता रहा है। यहां से ब्रह्मलीन महंत अवैधनाथ नाथ ने स्पृश्यता के खिलाफ मुहिम शुरू की थी। गोरखनाथ पीठ की तीनों पीढ़ियां दुग्धेश्वरनाथ नाथ मंदिर में पूजा करने आती रही हैं। इससे पहले योगी जब भी रुद्रपुर आए वह दुग्धेश्वरनाथ मंदिर में मत्था टेकना नहीं भूले। विधानसभा चुनाव के दौरान मंदिर में दर्शन को आए योगी ने मंदिर के विकास में योगदान देने का वादा किया था। महंत रमाशंकर भारती ने योगी को पत्र लिखकर पौराणिक धरोहर की रक्षा की मांग की है।
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दुग्धेश्वरनाथ मंदिर का महत्व
दुग्धेश्वरनाथ मंदिर का उल्लेख पद्मपुराण में किया गया है। मंदिर का इतिहास आठवीं शताब्दी का रहा है। मंदिर परिसर में स्थापित शिव पार्वती, गणेश, काली, भगवान बामन विष्ण़ु की काले पत्थर की मूर्ति ऐतिहासिक सहनकोट परिक्षेत्र से मिली हैं। यह मूर्तियां वर्ष 1864 से 1955 के बीच जमीन से खुदाई में प्राप्त हुई। मंदिर का निर्माण पैगोडा परंपरा के अनुसार अष्टकोण में हुआ। यहां जमीन से करीब 22 फिट नीचे दुग्धेश्वरनाथ का शिवलिंग है। लिंग स्वयंभू जमीन से निकला है।
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बदइंतजामी से मिट रहा इतिहास
बदइंतजामी के कारण मंदिर अपनी पहचान खोता जा रहा है। बेशकीमती मूर्तियों और शिवलिंग का साल दर साल क्षरण हो रहा है। चावल-दूध आदि चढ़ाने से मूर्तियों आकार खो रही हैं। शिवलिंग का क्षरण लगभग हो चुका है। मंदिर के गर्भगृह में सिर्फ एक इंच ही शिवलिंग बचा है। मंदिर की सफाई, रंगाई नहीं होने से दीवारों से पपड़ी उजड़ रही है। नागरिक समितियों को अधिकार नहीं मिलने से वह मंदिर के रंगरोगन में रुचि लेना बंद कर दी है। लोगों ने मंदिर को सरकारी ट्रस्ट बनाकर व्यवस्था देने की मांग की है।
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