देवरिया। जिससे थी मदद की आस उसी ने आफत में धकेल दिया। लाचारी में सिसकते ऐसे एक मजदूर का सहारा बनी कम्युनिटी पुलिसिंग। यह दास्तान है शहर के एक निजी नर्सिंग होम के चंगुल में फंसे एक बेबस मजदूर की। नर्सिंग होम संचालक छह हजार के लिए मजदूर की पत्नी को डिस्चार्ज नहीं कर रहा था। सड़क पर बिलख रहे मजदूर की परेशानी की जानकारी जब कम्युनिटी पुलिसिंग तक पहुंची तो उसे न केवल इलाज में मदद मिली, बल्कि पत्नी के इलाज के लिए कर्ज लेकर जमा की रकम को भी अस्पताल संचालक ने वापस कर दिया।
मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले रामगुलाम टोला निवासी राकेश मद्घेशिया की गर्भवती पत्नी आरती को दस दिन पूर्व प्रसव पीड़ा शुरू हुई। मोहल्ले की आशा रिंकू जायसवाल आरती को लेकर महिला जिला अस्पताल पहुंची। कुछ देर यहां रुकने के बाद आशा ने राकेश को झांसे में ले लिया। जच्चा-बच्चा को खतरा बताते हुए वह राघव नगर के मां विंध्यवासिनी नर्सिंग होम ले गई। यहां एक दिन गर्भवती का इलाज हुआ और डॉक्टर ने ऑपरेशन कर दिया और 20 हजार रुपये खर्च बताया। राकेश ने तीन दिन पूर्व ब्याज पर लेकर जैसे-तैसे 14 हजार रुपये तो जमा करा दिए, पर नर्सिंग होम वाले छह हजार के लिए आरती को डिस्चार्ज नहीं कर रहे थे। हालात से हारा राकेश अस्पताल के बाहर फूट-फूटकर रो रहा था। लोगों की नजर राकेश पर पड़ी तो उसकी परेशानी की जानकारी सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहने वाले दिग्विजय चौबे को दी गई। वह राकेश को लेकर महिला अस्पताल पहुंचे और सीएमएस को पूरी कहानी सुनाई। इसके बाद सारी जानकारी कम्युनिटी पुलिसिंग के प्रभारी विजय श्रीवास्तव को दी गई, तो मामले ने करवट ली। एसपी के निर्देश पर टीम नर्सिंगहोम पर पहुंची। देखते ही देखते वहां हड़कंप मच गया। टीम के बातचीत करने के बाद नर्सिंग होम संचालक ने राकेश की ओर से जमा 14 हजार रुपये वापस कर प्रसूता को डिस्चार्ज कर दिया। यही नहीं फ्री इलाज का भी वादा किया। एसपी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि शिकायत पर टीम पहुंची थी और राकेश की मदद की गई। अब पुलिस मजदूर को नर्सिंग होम पहुंचाने वाली आशा की तलाश कर रही है।