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‘देवी’ दरबार में आज ‘हाजिरी’ देगी डॉक्टरों की टीम

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पुरवा गांव में तथाकथित देवी के आश्रम में शनिवार दोपहर गिनती के लोग ही दिखे। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। शहर से लगे पुरवा गांव में चल रहे अंधविश्वास के मेले का प्रशासन ने संज्ञान लिया है। शनिवार को अमर उजाला में प्रकाशित खबर पर डीएम ने सीएमओ को वहां चिकित्सकों की टीम भेजने को कहा। बीमारियों और कथाकथित भूत-प्रेत से निजात की आस में वहां आ रहे लोगों को यह टीम आधुनिक इलाज और उपलब्धता की जानकारी देगी। यह भी देखेगी कि इलाज के नाम पर कोई अनियमितता तो नहीं हो रही। जरूरत पर सख्त कार्रवाई भी संभव है।
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पुरवा गांव में निवासी प्राथमिक शिक्षक शिव कुमार यादव की पत्नी व पूर्व शिक्षामित्र सुभद्रा खुद पर देवी आने का दावा कर रही हैं। करीब डेढ़ साल से घर के बाहर मंदिर नाम से बनाए जा रहे ढांचे में बैठती हैं। वहीं झाड़-फूंक का खेल चल रहा है। विशेषत: सोमवार और शुक्रवार को यहां मेले जैसा माहौल हो जाता है। अमर उजाला में खबर छपने के बाद शनिवार को वहां सन्नाटा छाया रहा। हालांकि कुछ का यह भी कहा कि ऐसा खास दिवस न होने की वजह से था। हां, इतना असर जरूर हुआ कि एक कमरे में जंजीरों से बांध कर रखी गई युवती वहां से हटा दी गई। कहा गया वह ठीक हो गई इसलिए परिवारीजन उसे घर ले गए। दोपर करीब एक बजे बरामदे में जंजीर से बंधा युवक जरूर उसी हाल में था। अगर वह रहा तो डॉक्टरों की टीम उसकी जांच करेगी। यह टीम ‘देवी’ की जांच करेगी या नहीं, इसकी जानकारी नहीं मिल सकी है।

इलाज कराएं, अंधविश्वास के
जाल में न फंसे लोग : डीएम
अमर उजाला की खबर से जिला प्रशासन के भी कान खड़े हुए। डीएम ने इसे गंभीरता से लेते हुए सीएमओ को डॉक्टरों की टीम भेजने और निगाह रखने का निर्देश दिया है। उन्होंने लोगों से ऐसे अंधविश्वास के जाल में न फंसने और मरीजों का उचित इलाज कराने की अपील भी की है। हालांकि थाना दिवस में उनकी व्यस्तता के कारण निर्देश देर से मिलने कारण स्वास्थ्य विभाग की टीम वहां नहीं जा सकी।
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एसपी ने भी कहा, कराएंगे जांच और कार्रवाई
अमर उजाला की खबर का एसपी रोहन पी कनय ने भी स्वत: संज्ञान लिया। उन्होंने बताया कि मामले की अपने स्तर से भी जांच कराएंगे। कुछ भी गड़बड़ पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस बीच, कोतवाली पुलिस ने शिव कुमार यादव को बुलाकर भीड़ कम कराने का निर्देश दिया। शिवकुमार का कहना है कि वह नहीं चाहते कि वहां भीड़ जुटे पर लोगों के न मानने से विवश हैं।

प्रेतबाधा नहीं, मानसिक रोग है यह
झाड़-फूंक अंधविश्वास: डॉ. बानो
संत विनोवा पीजी कॉलेज के मनोविज्ञान की विभाग की अध्यक्ष डॉ. नाजिस बानो ने कहा कि लोग जिसे प्रेतबाधा नाम देते हैं वे वास्तव मनोरोगों के लक्षण हैं। ऐसा व्यक्ति के मस्तिष्क पर किसी घटना के गहरे प्रभाव से भी हो सकता है। ऐसा व्यक्ति शारीरिक रूप से स्वस्थ होता है लेकिन जब पुरवा गांव जैसे स्थान पर पहुंचता है तो दूसरे को देखकर उसके मन की बातें बाहर आने लगती हैं। इससे लगता है कि बीमारी दूर हो रही है, पर कुछ समय फिर वही लक्षण उभरते हैं। सही उपचार ही इसका स्थायी निदान है।
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