देवरिया। जिला महिला अस्पताल में गर्भवती महिलाओं का सीजर कराना आसान नहीं है। अगर दलाल का माध्यम या ऊंची पहुंच नहीं है तो गर्भवती महिलाओं को मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जा रहा है। इसकी वजह लंबे समय से ओटी में एक स्टॉफ नर्स की तैनाती और जिम्मेदारों की लापरवाही बताई जा रही है।
जिला महिला अस्पताल दलालों का हब बन चुका है। तैनात कर्मचारी और स्टाफ नर्सों का भी आशीर्वाद इन पर रहता है। दूरदराज से आ रही गर्भवती महिलाओं को इलाज और सीजर के नाम पर मोटी रकम खर्च करनी पड़ रही है। तीन दिन से एक गर्भवती महिला को सीजर के लिए लेकर घरवाले आ रहे थे। इसके लिए डीएम भी सीएमएस से बोले। गुरुवार को जांच के दौरान जांच में कमी बताकर सीजर करने से मना कर दिया। वही जांच प्राइवेट पैथॉलाजी से कराया गया तो रिपोर्ट सही आया। यह मामला विभागीय अफसरों तक पहुंचा तो हड़कंप मच गया। आनन-फानन में शुक्रवार को गर्भवती महिला का सीजर सीएमएस ने खुद किया और किसी से शिकायत नहीं करने की बात कही। सूत्रों की माने तो ओटी का चार्ज स्टॉफ नर्स सीमा यादव को सात साल पूर्व एक सपा नेता की पैरवी पर मिला था। लंबे दिनों से इसकी तैनाती के कारण दलालों की सक्रियता बढ़ गई है। लोगों की शिकायत पर सीमा यादव स्टॉफ नर्स को सुमित्रा तिवारी को चार्ज देने के लिए एक माह पूर्व आदेश हुआ। लेकिन वह आज तक चार्ज नहीं दी है। इस बाबत सीएमएस डॉ. माला कुमारी ने कहा कि अस्पताल की दीवारों पर दलालों से सावधान का स्लोगन लिखवाया गया है। लोग को खुद जागरूक रहना चाहिए। जांच में गड़बड़ी के चलते महिला के सीजर में देर हुआ है। स्टॉफ नर्स को चार्ज देने के लिए पत्र जारी हुआ है। इसके लिए रिमाइंडर किया जाएगा।