45 सचिवों ने दिया सामूहिक इस्तीफा
देवरिया। यूरिया की कालाबाजारी के आरोप में सचिवों पर कार्रवाई का मामला तूल पकड़ने लगा है। जिला कृषि अधिकारी पर प्रशासनिक अधिकारियों को भ्रमित कर कार्रवाई का आरोप संयुुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ ने लगाया है। संगठन से जुड़े जिले की समितियों के 45 सचिवों ने केस वापसी की मांग को लेकर सामूहिक रूप से शुक्रवार को इस्तीफा दे दिया। इसको लेकर विभागीय अफसरों की बेचैनी बढ़ गई है।
जिले में यूरिया की कालाबाजारी की जांच में कुछ सचिव और दुकानदार दोषी मिले। अधिकांश सचिव और दुकानदारों पर केस भी दर्ज हो गया है, बाकी दुकानदारों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया। कार्रवाई से खफा उत्तर प्रदेश संयुक्त सहकारी समिति कर्मचारी संघ के पदाधिकारियों ने जिला कृषि अधिकारी पर डीएम को गुमराह कर सचिवों पर केस दर्ज कराने का आरोप लगाया है। नाराज जिले के 45 सचिव जिलाध्यक्ष भूपेंद्र नाथ यादव के नेतृत्व में पहुंचे और अपना सामूहिक इस्तीफा सहायक आयुक्त एवं सहायक निबंधन सहकारिता को दिया। सभी सचिव एक स्वर में बोले कि कोरोना काल में पॉश मशीन का प्रयोग करने से किसान परहेज कर रहे थे। यूरिया बिक्री में जिस आधार कार्ड का प्रयोग किया गया है, वह किसानों का ही है, किसी दूसरे का नहीं। इनका नाम, पता रजिस्टर में दर्ज है। रजिस्टर का सत्यापन कराया जाए। बेकसूर सचिवों पर कार्रवाई ठीक नहीं है। इसके लिए संगठन संघर्ष करेगा। अचानक सामूहिक इस्तीफे से विभागीय अफसरों की चिंता बढ़ गई है। इस दौरान महामंत्री अश्वनी मणि, महेंद्र यादव, भूपेंद्र नाथ यादव, रामप्रसाद, त्रिलोकी नाथ सिंह, उमाशंकर सिंह, अवधेश यादव, इंदू यादव, विशाल सिंह, दिलीप कुमार, रामायन गुप्ता, राजेश्वर, चौथी तिवारी आदि मौजूद रहे।
जिला कृषि अधिकारी मुहम्मद मोजम्मिल ने बताया कि 20 उर्वरक विक्रेताओं और सचिवों की सूची केंद्रीय टीम ने भेजी थी। जांच में यूरिया की कालाबाजारी पकड़ में आई। इन लोगों के खिलाफ कार्रवाई हुई है। इन लोगों का आरोप निराधार है।