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एचआईबी पाजीटिव महिलाएं 41 स्वस्थ्य बच्चों को दी जन्म

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डेमो - फोटो : डेमो
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नीलांबुज मिश्र
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देवरिया। एचआईवी से लड़कर जनपद की 41 गर्भवती ने स्वस्थ बच्चों को जन्म दिया। अपनों से प्यार में मिले इस घातक बीमारी का जितना उन्हें मलाल है, उतना ही एचआईवी रहित शिशु को जन्म देने की खुशी भी। इन शिशुओं पर एड्स नियंत्रण विभाग की नजर है। समय-समय पर इनका चेकअप भी कराया जाता है।
रोजगार के चक्कर में परदेस गए कुछ लोगों ने अपनी जीवन संगिनी को अनजाने में एड्स के शिकार हुए और फिर अनजाने में ही यह बीमारी उनसे उनकी जीवनसाथी तक पहुंच गई। वर्ष 2011 से अब तक जिले में ऐसे 85 दंपतियों का पता चला है। विभागीय जिम्मेदारों की मानें तो महिलाओं को यह बीमारी उनके पति से मिली है। इनमें से अधिकतर महिलाओं को इसकी जानकारी गर्भवती होने के बाद अपने खून की जांच कराने पर हुई। एचआईवी पॉजिटिव होने का पता चलने पर कई महिलाओं ने इस डर से गर्भपात कराने की सोची कि कहीं उनकी होने वाली संतान को भी एड्स से न जूझना पड़े , लेकिन एड्स नियंत्रण विभाग के संपर्क के आने के बाद इनकी सोच में सकारात्मक बदलाव आया।
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विभाग की ओर से मिली सलाह पर अमल करते हुए 65 गर्भवतियों ने दवाओं की मदद से एड्स से जंग लड़ने की ठानी। विभाग ने तत्काल इन गर्भवती महिलाओं को दवाएं देकर इलाज शुरू कर दिया। इसमें से 41 को इसमें जीत भी मिली और उन्होंने जिला अस्पताल में स्वस्थ्य शिशु को जन्म दिया। दूसरी ओर बाकी गर्भवतियों के शिशुओं में एचआईवी पॉजीटिव पाया गया। इनमें से दो की मौत हो गई है, जबकि अन्य का इलाज चल रहा है। 18 माह बाद इन बच्चों की अंतिम जांच किए जाने के बाद पता चलेगा कि शिशु एचआईवी से संक्रमित हैं या नहीं। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीरेंद्र झा ने बताया कि शुरुआती दौर में जांच के दौरान बीमारी पकड़ में आ जाए तो दवा और हौसले के दम पर इस बीमारी पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
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18 माह में तीन बार डीबीएल की होती है जांच
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. वीरेंद्र झा की माने तो एचआईवी पीड़ित गर्भवती स्वस्थ्य बच्चे को जन्म दे सकती है। इस बीमारी की जद में आई गर्भवती को एचआईवी का दवा पूरे जीवन खाना जरूरी है। गर्भवती को अगर शुरूआती दौर में एचआईवी पॉजीटिव की जानकारी हो जाए और दवा शुरू कर दे तो जन्म लेने वाले शिशु में एचआईवी निगेटिव होगा। एचआईवी पॉजीटिव महिला से जन्म लेने वाले शिशु की 18 माह तक दवा चलेगी। इसके अलावा छह सप्ताह और छह माह के अंदर एक जांच, छह माह से 12 माह के बीच में दूसरा जांच और 18 माह पर तीसरी जांच कराई जाती है। ड्राई ब्लड सेल्स की जांच के लिए एनआरएल केंद्र नोएडा जाता है।
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