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बिना मान्यता के चार मदरसे पकड़े गए

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बिना मान्यता के चार मदरसे पकड़े गए
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अवामी और विदेशी चंदे से चल रहे
संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। गैर मान्यता प्राप्त और बिना अनुदानित मदरसों की जांच में सच्चाई सामने आने लगी है। अभी जनपद के चार मदरसे ऐसे पाए गए हैं, जिनकी मान्यता नहीं है। पर संचालित हो रहे थे। इसमें अधिकतर में अवामी चंदा और विदेश से आने वाले धन का उपयोग किया जाता है। अल्प संख्यक कल्याण विभाग की जांच में सभी विकास खंडों में ऐसे मामले प्रकाश में आ सकते हैं।
जनपद में 122 मदरसे रिकॉर्ड के रूप में सरकारी अभिलेखों में दर्ज हैं। इसमें 17 मदरसा मान्यता प्राप्त हैं। इनका खर्च हर माह सरकार उठाती है। सबसे बड़ा सवाल तो यह है कि जिन मदरसों की मान्यता नहीं है और अनुदान नहीं मिलता है, उनका खर्च कैसे चलता है। इसको लेकर शासन के गंभीर होने के बाद जिला अल्पसंख्यक कल्याण विभाग भी सक्रिय हो गया है।
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विभागीय सूत्रों की बातों पर गौर जाए तो जांच-पड़ताल के दौरान अभी तक गौरी बाजार और बैतालपुर में एक-एक, देसही देवरिया में दो मदरसे बिना मान्यता के पाए गए हैं। विभाग की ओर से बारह बिंदुओं पर जांच आख्या तैयार की जा रही है। कुछ मदरसा संचालकों ने सर्वे टीम को पूछताछ के दौरान बताया है कि अवामी चंद से जुटाए गए लाखों रुपये के सहारे मदरसों के शिक्षक का वेतन और अन्य खर्च का वहन किया जा रहा है। जबकि दूसरी तरफ विदेश से भी रुपये खर्च के लिए आने की बात सामने आ रही है।
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इसको लेकर जांच की जा रही है कि आखिर विदेश में रहने वाला व्यक्ति कौन है, जो चंदा मदरसों को दे रहा है। बिना अनुदान के चलने वाले मदरसों में पढ़ने वाले बिहार और बंगाल के भी लड़कों के होने की संभावना है। माना जा रहा है कि जांच का दायरा आगे बढ़ा तो मदनपुर, सलेमपुर, लार, तरकुलवा, देसही देवरिया, बरहज, रुद्रपुर, देवरिया सदर सहित अन्य विकास खंडों में काफी संख्या में ऐसे मदरसे सामने आएंगे, जिनकी मान्यता नहीं है। वहीं, गैर अनुुदानित होने के बाद भी चल रहे हैं।
कोट
सर्वे का कार्य चल रहा है, अभी तक चार मदरसे गैर मान्यता के पाए गए हैं। बारह बिंदुओं पर जांच की जा रही है। चंदे का ब्योरा भी खंगाला जा रहा है।
-नीरज अग्रवाल, जिला अल्प संख्यक कल्याण अधिकारी
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