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अवैध होर्डिंग से नगरपालिका को नुकसानc

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शहर के ट्युबवेल कालोनी चौराहे पर लगा होर्डिग। - फोटो : अमर उजाला
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देवरिया। एक तरफ नगरपालिका बजट का रोना रो रही है तो दूसरी तरफ जिम्मेदारों की अनदेखी से हर साल लाखों रुपये राजस्व देने वाले स्रोत के प्रति बेपरवाह बनी है। बैनर-होर्डिंग से अपना प्रचार-प्रसार करने वाले नगर पालिका को चूना लगा रहे हैं। नगर पालिका क्षेत्र में सिर्फ 66 स्थान ही बैनर-होर्डिंग के लिए अनुमन्य हैं, जबकि 200 से अधिक स्थानों पर बैनर-होर्डिंग टंगे हुए हैं। पालिका न तो उनसे टैक्स ले पा रही है और न ही कोई कार्रवाई कर रही। जिम्मेेदार बजट का रोना रोकर नगर के विकास पर ब्रेक लगाए हुए हैं।
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नगर क्षेत्र में कहीं भी प्रचार-प्रसार का बैनर-होर्डिंग लगाने के लिए नगर पालिका से अनुमति लेनी होती है। यह आय का प्रमुख जरिया है। नगर पालिका हर वर्ष इसके लिए टेंडर निकालती है। इस वर्ष छह फर्मों को इसके लिए अधिकृत किया गया है, जो नगर पालिका से चिह्नित 66 स्थानों पर ही कोई बैनर-होर्डिंग लगवा सकते हैं। एरिया लोकेशन के लिहाज से फर्म पालिका को टैक्स चुकाते हैं। शहर के वीआईपी एरिया में होर्डिंग लगाने के लिए नगरपालिका को 1200 रुपये प्रति वर्ग मीटर के हिसाब राजस्व का लाभ मिलता है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 18 मई तक नगरपालिका को तीन लाख 29 हजार 950 रुपये विज्ञापन से मिल चुके हैं। जमीनी हकीकत इससे इतर है। जिम्मेदारों की आंखों में धूल झोंककर 200 से अधिक स्थानों पर होर्डिंग टांग दिया गया है। इसके बदले मोटी रकम भी वसूली गई है, मगर यह पैसा नगर पालिका की बजाए फर्मों की जेब भर रही है। तमाम संस्थाओं के होर्डिंग मानकों के विरुद्ध लगे हैं, तो कई ऐसे पब्लिक प्लेस हैं जिन्हें नगरपालिका ने अपनी सूची से बाहर रखा है। इन स्थानों पर अवैैध प्रचारकों का कब्जा है।

बजट की कमी से अटका है विकास
नगरपालिका में बजट की कमी के चलते विकास कार्य ठप पड़े हैं। एलईडी लाइट की खरीदारी नहीं हो पा रही है। सफाई अनुभाग के पास संसाधन नहीं हैं। डस्टबीन लगाने की योजना अधर में लटकी पड़ी है। शहर की सड़क नालियां बदहाल हैं। पालिका प्रशासन के पास रिपेयरिंग के लिए भी रुपये नहीं है। नगरपालिका के अपने आय के कई स्रोत हैं इनमें विज्ञापन टैक्स भी शामिल है।
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यहां लगता है राजस्व का चूना
सिंचाई विभाग चौराहे पर रेलवे स्टेशन रोड, स्टेडियम रोड, चकियवां चौराहा, शीशी रोड, भुजौली कालोनी रोड, परशुराम चौक, टाऊनहॉल के अलावा तमाम ऐसे स्थल हैं जहां बिना अनुमति के बड़े पैमाने पर प्रचार सामग्री लगाई जाती है। शहर के मुख्य मार्गों पर लगे बिजली के खंभों पर तमाम प्रचार सामग्री लगी होती है, जिसका टैक्स नगरपालिका को नहीं मिल पा रहा। इनके अलावा तमाम मकानों पर वाल पेंटिंग और छतों पर लगे बड़े होर्डिंग के बावजूद नगरपालिका मकान मालिकों से साधारण टैक्स ही वसूल पाती है, जबकि ऐसे घरों पर कॉमर्शियल टैक्स लगना चाहिए।

पालिका प्रशासन की सुस्ती से बढ़ रहा खतरा
नगरपालिका प्रशासन की सुस्ती के चलते तमाम जगहों पर खतरा बढ़ गया है। अवैध विज्ञापन कारोबारी मनमाना जगहों पर बांस बल्लियों के सहारे बड़े-बड़े होर्डिंग लगाए हुए हैं। इससे सड़कों पर अतिक्रमण बढ़ने के साथ ढीले-ढाले स्ट्रक्चर आंधी आने पर राहगीरों के लिए खतरा बने हुए हैं।

हर माह दो से ढाई लाख का नुकसान
नगर पालिका ने सिविल लाइन, कोतवाली रोड, डीएम आवास, कलेक्ट्रेट, कोऑपरेटिव चौराहे जैसे वीआईपी इलाकों के लिए होर्डिंग लगाने का रेट 1200 रुपये प्रति वर्ग फीट तय कर रखा है। अन्य जगहों के लिए रेट 800 से 1000 रुपये तक है। कुल 66 चिह्नित स्थानों पर लगे होर्डिंग से तीन लाख रुपये आय अर्जित करने वाले पालिका प्रशासन को अन्य स्थानों पर लगी अवैध होर्डिंग से करीब दो से ढाई लाख रुपये हर माह का नुकसान उठाना पड़ रहा है।

जल्द ही अभियान चलाकर शहर में लगी अवैध प्रचार सामग्रियों को हटाया जाएगा। इस दौरान मानकों का ख्याल नहीं रखने वाले पंजीकृत फर्मों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
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-हरिश्चंद्र, कर अधीक्षक, नगर पालिका।
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