रुद्रपुर/एकौना। प्रलयंकारी बाढ़ की विभीषिका में दोआबा के करीब दो सौ मकान पस्त हो चुके हैं। साथ ही बचे हुए मकानों के गिरने का सिलसिला जारी है। बाढ़ में मकान गवां चुके पीड़ितों को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है। पानी में रोटी कपड़ा गवां चुके लोग अब खुले आसमान के नीचे रात काटने को मजबूूूर हैं।
पानी कम होने के बाद भी बाढ़ पीड़ितों का दर्द कम नहीं हुआ है। पानी से ध्वस्त हुए मकानों का मुुआवजा देने की प्रशासन अब तक कोई व्यवस्था नहीं कर पाया है। बलेवा दुबौली, लालपुर परसिया, भगवान माझा, पचलड़ी, कोड़री गांव में पक्की, खपरैल और फूस की बनी सौ मकान धराशायी हो चुके है। महीनों तक डूबे रहे मकानों से पानी निकलने के बाद उसमे रहना खतरे से खाली नहीं है। मकान गिरने के डर से बाढ़ पीड़ित अभी भी बंधो पर ही रात काट रहे हैं। बलेवा दुबौली के कृपानाथ पांडेय की मकान में पानी में धराशायी होने के बाद से उनका पूरा परिवार गांव में दूसरे के घर में शरण लिए हुए है। लालपुर परसिया के ग्राम प्रधान बाबूराम का पक्का मकान धंस चुका है। यहां शीतल, कमला, राजेश फूलचंद पांडेय, घरभर प्रसाद सहित 25 लोगों के कच्चे और पक्के मकान जमीदोज हो चुके हैं। पचलड़ी के अलाउद्दीन, सत्यनारायण सिंह, गंगा सागर पाल का मकान ध्वस्त होने के कारण उनका पूरा परिवार बंधे पर शरण लिए हुए है। तहसीलदार सूर्यभान गिरि ने बताया कि लेखपालों को ध्वस्त और क्षतिग्रस्त मकानों का ब्योरा एकत्र करने का निर्देश दिया गया है। दोआबा में बाढ़ से ध्वस्त हुए मकानों की पूरी रिपोर्ट तैयार हो रही है। मकान मलिकों को शासन के निर्देश के अनुसार मुआवजा या आवास उपलब्ध कराया जाएगा।