विश्वविजय त्रिपाठी
रुद्रपुर/एकौना। दोआबा में आई भीषण बाढ़ में जीवित इंसानों से अधिक लाशों की दुर्दशा हो रही है। शव जलाने को लोगों को दो गज सूखी जमीन तक नहीं मिल रही। गांव के लोग नाव से जमीन तलाश कर रहे हैं। ऊंची जगह मिलने के बाद चंद लोग जाकर शवों को जला रहे हैं। चारों तरफ पानी से घिरने के कारण शव जलाने को लकड़ी भी नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कम लकड़ी में ही कई लोग अधजली लाशों को पानी में बहा दे रहे हैं। शव जलाने की दिक्कतें बाढ़ पीड़ितों को कचोट रही हैं।
गुरुवार को पानी में घिरे पचरुखा गांव के गोरख सिंह की हॉर्टअटैक से मौत हो गई। करीब तीन घंटे तक तलाश करने के बाद घरवालों को शव जलाने के लिए जगह मिली। गांव के लोग पानी पारकर अंतिम संस्कार में शामिल होने को पहुंचे। दस दिन से बाढ़ की विभिषिका झेल रहे 52 गांव में भगवान मांझा के जोखन यादव, सरांव बुजुर्ग के नीरज यादव, अनुसा के संदीप की मौत हो चुकी है। तीनों की बड़ी मुश्किल से शव लेकर लोग गांव से बाहर निकले। करीब पांच से सात किलोमीटर नाव से यात्रा करने के बाद लोग पचलड़ी बंधे पर पहुंचे। बंधे पर शरण लिए लोगों की झोपड़ी से कुछ दूरी पर दाह संस्कार हुआ। नीबा, छपरा, जगदीशपुर, भेलऊर आदि गांव में हुई मौत पर लोगों को बंधों के किनारे शव जलाने पड़े। शव जलाने के लिए लोगों को दस किलोमीटर की दूरी से रुद्रपुर से लकड़ी खरीद कर ले जाना पड़ रहा। बाढ़ के दौरान हो रही मौत से मृतकों के परिवार की दुश्वारियां बढ़ जा रही हैं। उन्हें शव जलाने के लिए परेशान होना पड़ रहा। परिवार को सांत्वना देने उनके रिश्तेदार भी नहीं पहुंच पा रहे हैं।