तकरीबन तीन करोड़ की लागत से संवेरगा मंदिर परिसर, 1.40 करोड़ की पहली किस्त स्वीकृत
नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ की जन्मस्थली होने से खुखुंदू का नाम चहुंओर है विख्यात
खुखुंदू। जैन धर्म के नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ की जन्मस्थली होने से खुखुंदू का नाम चहुंओर विख्यात है। अब इस क्षेत्र को बड़े तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने की तैयारी चल रही है। मंदिर परिसर को वृहद रूप में संवारने के लिए तकरीबन तीन करोड़ खर्च किए जाएंगे। इसमें 1.40 करोड़ की पहली किस्त स्वीकृत हो गई है।
प्राचीन जैन मंदिर के जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुंचने के बाद जैन समाज के लोगों द्वारा तकरीबन एक दशक पूर्व में मंदिर का जीर्णोद्धार कराया गया। उसमें भगवान पुष्पदंत नाथ की नौ फीट ऊंची प्रतिमा स्थापित की गई है। कीमती पत्थरों से बना यह मंदिर दूर से ही आकर्षण का केंद्र बना रहता है।
हालांकि, शासन स्तर से अब तक मंदिर परिसर में कोई निर्माण कार्य नहीं कराया गया था। समाज के लोगों द्वारा तीर्थ क्षेत्र के रूप में विकसित करने की हमेशा मांग की जा रही थी। जैन समाज की मांग को ध्यान में रखते हुए वर्तमान सरकार ने पहली बार शासन से धन अवमुक्त कराया है।
शासन की ओर से पर्यटन विभाग और कार्यदायी संस्था को जारी किए गए पत्र में तकरीबन तीन करोड़ की लागत से मंदिर परिसर में विकास कार्य कराने का जिक्र है। इसकी पहली किस्त एक करोड़ चालीस लाख रुपये स्वीकृति हो गई है। संवाद
कोट...
शासन से पर्यटन विभाग और कार्यदायी संस्था को पत्र जारी किया गया है। कार्यदायी संस्था से टेंडर प्रक्रिया पूरी कराकर जल्द ही कार्य शुरू कराया जाएगा।
-रवींद्र कुमार, मुख्य विकास अधिकारी, देवरिया
ये है मंदिर का इतिहास
खुखुंदू नगरी पहले काकंदी नगरी नाम से विख्यात था। मंदिर में स्थापित कीर्ति स्तंभ और शिलापटों पर अंकित मान्यताओं के मुताबिक यहां इक्ष्वाकुवंशीय क्षत्रिय महाराजा सुग्रीव की महारानी जयरामा थीं। महारानी के गर्भ से मगसिर शुक्ला प्रतिपदा के मूल नक्षत्र में नौवें तीर्थंकर भगवान पुष्पदंत नाथ महाराज का जन्म हुआ था। इस अवसर पर सौ धर्म इंद्र और असंख्य देव-देवियों ने यहां पहुंचकर भगवान का जन्म कल्याणक महोत्सव धूमधाम से मनाया था। इनके शरीर का वर्ण चंद्रमा की तरह श्वेत था। भारत के दिगंबर जैन तीर्थ भाग-1 में काकंदी नगरी के परिचय में अनेक ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख भी मिलता है। 1871 में प्रकाशित कनिंघम के सर्वेक्षण रिपोर्ट में भी इस स्थान की विशद विवेचना मिलती है। यहां के घने जंगलों में भगवान पुष्पदंत नाथ ने वर्षों तपस्या की थी। बताया जाता है कि महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर है। जबकि भगवान पुष्पदंत नाथ नौवें तीर्थंकर हैं। इनका दूसरा नाम सुविधि नाथ भी है।
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सड़क की पटरियों पर गंदगी का अंबार
खुखुंदू। यहां का जैन मंदिर जैन धर्मावलंबियों के साथ-साथ क्षेत्र के लिए भी बहुत महत्वपूर्ण है। बावजूद इसके सड़क की दोनों पटरियों पर गंदगी का अंबार लगा है। इसके अलावा दिन पर दिन सड़क संकरी होती जा रही है। वर्तमान में चौराहे से कुछ दूरी तक तक तो सड़क ढलाई हो गई है। मगर बाकी सड़क मंदिर तक टूटी-फूटी है। मरम्मत न होने से इन दिनों सड़क खस्ताहाल हो गई है। मंदिर के प्रबंधक/पुजारी बसंत लाल जैन ने बताया कि कई बार शिकायत दर्ज कराई गई लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।