सलेमपुर। आग में जलकर राख हुए गेहूं की फसल का मुआवजा किसानों को नहीं मिल सका। प्रभावित किसान तहसील में अफसरों का चक्कर काट रहे हैं। इसकी वजह मंडी समिति की ओर से होने वाली जांच पूरा नहीं होना बताया जा रहा है। किसानों की बातों को अफसर गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
18 अप्रैल से 20 जून तक यानी दो माह में आग ने जमकर तांडव मचाया। इसमें जहां अनेक लोगों का आशियाना राख हो गया, वहीं तहसील के 437 किसानों का गेहूं की फसल खेत में जलकर राख हो गई। तहसील प्रशासन ने आगलगी की घटनाओं की जांच के बाद इसकी रिपोर्ट मंडी समिति देवरिया को भेज दिया। इसमें अभी तक सिर्फ 34 किसानों को ही मुआवजा मिल सका। 403 किसान इसके लिए तहसील अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। जमुई के जवाहर सिंह, ओमप्रकाश सिंह, रामजी कुशवाहा, हरिलाल यादव, रंजीत यादव, बलराम, मनोज तिवारी, राजकिशोर तिवारी, धर्मेन्द्र आदि किसानों का कहना है कि प्रदेश सरकार ने एक माह के अंदर आगलगी से प्रभावित किसानों का मुआवजा देने का ऐलान किया था। लेकिन दो माह बाद भी इन किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका है। खरीफ सफल की बुआई शुरू हो गई है। ऐसे में किसानों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। तहसीलदार राहुल देव भट्ठ ने बताया कि तहसील प्रशासन ने जांच कर रिपोर्ट भेज दिया है। मुआवजा के लिए धन मंडी समिति धन आवंटित करता है। लेकिन अभी तक धन आवंटित नहीं हुआ है। इस लिए अधिकांश किसानों को मुआवजा नहीं मिल सका।