देवरिया। खून के काले कारोबार पर रोक लगाने के लिए स्वास्थ्य महकमा ने कमर कस लिया है। ब्लड बैंक में रक्त देने से पहले रक्तदाताओं को थंब इंप्रेशन (अंगूठे का निशान) देना होगा। इससे पेशेवर रक्तदाताओं पर लगाम लगेगा। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में बहुत जल्द यह सुविधा शुरू हो जाएगी।
सामान्य तौर पर सेहतमंद लोग तीन महीने में एक बार खून दे सकते हैं, लेकिन नशे के दलदल में फंसे कई लोग इसे धंधा बना चुके हैं। ब्लड बैंक कर्मचारियों को गुमराह कर नशे का सेवन करने के लिए तीन माह में दो से तीन बार नाम बदलकर रक्त देते हैं। इसके एवज में उन्हें 500 से 700 रुपये आसानी से मिल जाता है और विभाग को इसकी जानकारी तक नहीं होती है। नशे के लती लोगों को कई बीमारियां भी इसकी वजह से हो जाती है। इनका ब्लड दूसरे मरीजों में चढ़ाने पर उसे बीमारी या इंफेक्शन होने की आशंका रहती है। खून के इस काले कारनामे को रोकने के लिए ब्लड बैंक में खून देने वालों को अंगूठे का निशान देना होगा। बिना इसके उसका खून नहीं लिया जा सकता है। थंब इंप्रेशन मशीन ब्लड बैंक में लग गई है। इसकी तैयारी में ब्लड बैंक के कर्मचारी जुटे हैं।
ऑनलाइन होगा ब्लड बैंक
ब्लड बैंक में एनबीआईसी की ओर से नया साफ्टवेयर लोड किया जाएगा। इससे यहां ई-रक्तकोष बन जाएगा और सभी सुविधाएं ऑनलाइन हो जाएंगी। यह व्यवस्था लागू होने के बाद रक्त लेने और देने वालों को आधार कार्ड देना अनिवार्य हो जाएगा और बार कोडिंग के हिसाब से ब्लड मिलेगा। ब्लड बैंक में कौन से ग्रुप का कितना यूनिट रक्त है, इसकी भी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हो जाएगी।
800 यूनिट साल में होता है रक्तदान
ब्लड बैंक से प्रति दिन 12 से 15 यूनिट ब्लड की सप्लाई होती है। साल में 3000 से अधिक यूनिट ब्लड लोगों को दिया जाता है। 800 से अधिक यूनिट विभिन्न कैंपों के जरिए स्वेच्छा से रक्त भी करते हैं। ऑनलाइन सुविधा लागू होने से सहूलियत होगी।
रक्त कोश में एबी पॉजीटिव रक्त नहीं
ब्लड बैंक में ब्लड रखने की क्षमता 3000 यूनिट का है। वर्तमान में 90 यूनिट ब्लड उपलब्ध है, लेकिन इसमें एबी पॉजीटिव ब्लड नहीं है। इसकी वजह से इस ग्रुप के मरीजों को जरूरत पड़ने पर ब्लड नहीं मिल पाएगा।
ब्लड बैंक में रक्तदाताओं के लिए थंब इप्रेशन मशीन लग गया है। इसमें साफ्टवेयर अपलोड करना बाकी है। इसके बाद मशीन कार्य करने लगेगी। ई-रक्तकोष का भी कार्य बहुत जल्द पूरा हो जाएगा। खून के काले कारोबारियों पर जहां रोक लगेगी, वहीं ब्लड बैंक के कार्यों में पारदर्शिता आएगी।
- डॉ. सुभाष चंद्र सिंह ब्लड बैंक प्रभारी।