आसिफ इकबाल
देवरिया। बैतालपुर चीनी मिल के मसले पर अफसर शुरू से उदासीन रहे हैं। वर्ना पेराई का कार्य काफी पहले शुरू हो गया होता। विक्रय पत्र में राज्य हित और जनहित के लिए चीनी मिलों में पेराई का कार्य जारी रखने, कर्मचारियों का भुगतान और काश्तकारों के हितों के पालन का स्पष्ट उल्लेख है। बावजूद इसके अफसरों ने कोई पहल नहीं की। चीनी मिल चलाओ संघर्ष समिति ने प्रमुख सचिव चीनी उद्योग और गन्ना विकास आयुक्त को सत्यापित नकल की कॉपी सौंपी हैं।
मायावती के मुख्यमंत्रित्व कार्यकाल में प्रदेश की 11 चीनी मिल बेची गईं, जिसमें जिले की बैतालपुर के अलावा देवरिया और भटनी शामिल हैं। बैतालपुर चीनी मिल का क्षेत्रफल 47 हेक्टेयर यानी लगभग 250 बीघे में है। इसके परिधि में 273 गांव शामिल रहे हैं। चीनी मिल चालू होने से जिले में 12 हजार हेक्टेयर में पेराई होती रही है, लेकिन अब घटकर 7500 हेक्टेयर पर सिमट गई है। चीनी मिल की बिक्री पर तमाम सवाल उठें। विभिन्न संगठनों ने बाजार मूल्य से कम कीमत पर बेचने का आरोप लगाया। तत्कालीन प्रदेश सरकार ने चीनी मिल तो बेच दिया, लेकिन चीनी मिल के स्वरूप से छेड़छाड़ करने की सख्त ताकीद की है। इसके साथ ही कहा है कि बिक्री को विनिवेश के संबंध में कार्रवाई बताया है। साथ ही एग्रीमेंट के माध्यम से चीनी मिल के असेट्स और लाइबिल्टीज भी क्रेता को दिए गए हैं। क्रेता के साथ गन्ना के पेराई के मकसद से एग्रीमेंट किया है। शर्त और प्रतिबंधों के जरिए चीनी मिल को हर हाल में चलाने का आदेश है, लेकिन जिले के अफसरों ने इस दिशा में कोई पहल नहीं की है। सूत्रों के अनुसार चीनी मिल के खरीदार प्रभावशाली रहे हैं ऐसे में अफसरों ने पेराई के लिए पहल करने से दूरी बनाए रखे। उनका मानना था कि कार्रवाई करने पर कहीं शासन का नजरिया टेढ़ा न हो जाए। इसके चलते चीनी मिल को चालू कराने में पहल नहीं की है। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में लंबित है। खरीद बिक्री पर रोक है। ऐसे में अब मामला हाईलेवल का हो गया है। उधर, इलाकाई किसान भी आंदोलन शुरू करने में जुटे हैं।