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बिना दलाल नहीं होगा इलाज

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नीलांबुज मिश्र
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देवरिया। जिला अस्पताल में एक रुपये में इलाज कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है। सरकारी प्रयासों पर दलालों की नेटवर्किंग भारी पड़ रही है। सस्ते इलाज की उम्मीद लिए अस्पताल आने वाले मरीज दलालों के चंगुल में फंसकर लुट रहे हैं। विभागीय मिलीभगत से दलालों का हनक ओपीडी से वार्डों तक दिखती है। इससे सिर्फ मरीजों का आर्थिक शोषण नहीं, बल्कि अस्पताल प्रशासन और शासन के इंतजाम पर सवाल खड़ा हो रहा है। अस्पताल से दलालों का वर्चस्व तोड़ने के लिए सख्ती की जरूरत है।

दूसरा शनिवार होने के कारण 12 बजे तक ही ओपीडी चला। विशुनपुरा बाजार के रहने वाले 55 वर्षीय अब्दुल हमीद सुबह 8.30 जिला अस्पताल पहुुंचे। कुछ देर कतार में लगने के बाद काउंटर से पर्ची कटी। ढाई घंटे इंतजार के बाद ओपीडी में नंबर आया। इनका कहना है कि हमसे बाद में आने वाले लोग दलालों के माध्यम से तुरंत डॉक्टर के पहुंच और उनका इलाज हुआ। इजरही के हरिहर दास को तीन घंटे बाद इलाज मिला। इसके अलावा सैकड़ों मरीज डॉ. डीके सिंह से दिखाने के लिए ओपीडी के बाहर इंतजार कर रहे थे। पर्ची काउंटर पर लंबी कतार पुरुष और महिलाओं की अलग-अलग लगी थी। यहां मौजूद दो दलाल लोगों के साथ ऐसे पेश आ रहे थे कि वह यहां के कर्मचारी हैं। दलालों का सहयोग लेने पर बिना कतार में लगे पर्ची बन जाती थी। यहीं हाल ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक देखने को मिली। सीएमएस डॉ. छोटेलाल ने बताया कि डॉक्टरों की कमी के चलते भीड़ हुई थी। अस्पताल परिसर में पुलिस चौकी बनी है। लेकिन यहां तैनात पुलिस वाले खुद दलालों को शह देते हैं। इसकी वजह से दलालों के हौसला बुलंद हैं। इसके लिए एसपी को पत्र भेजा जाएगा और दलालों के धरपकड़ के लिए अभियान चलेगा।
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सरकारी अस्पताल का इलाज दे रहा दर्द
हड्डी रोग चिकित्सक डॉ. पीएन कन्नौजिया से दिखाने के लिए मायापुर इमीलिया की एकमी देवी को उसकी ननद निशा सुबह आठ बजे लेकर आई और कतार में लग गईं। लेकिन डॉक्टर 8.30 बजे ओपीडी में पहुंचे। दलन छपरा की सोनमती देवी, महुआबारी की पूनम आदि ने बताया कि तीन घंटे से लाइन में लगकर इंतजार किया जा रहा है। अभी तक नंबर नहीं आया। सिर्फ कहने को यह सरकारी अस्पताल है। दलालों की मदद लेने पर डॉक्टर तत्काल देेेख रहे हैं।


इमरजेंसी में इलाज के नाम पर धोखा
इमरजेंसी में बेड की कमी से मरीजों को कुर्सी पर लिटा बोतल चढ़ाया जा रहा है। एक बेड पर दो मरीज भर्ती हैं। इस समस्या से लोग लंबे दिनों से जूझ रहे हैं। दवाइयों की कमी के कारण लोगों को बाहर से खरीदनी पड़ रही है। रात को आने वाले मरीजों को अधिकांश दवाइयां बाहर लेनी पड़ती है।

रसोई घर में लगा ताला
अस्पताल में भर्ती मरीजों को भोजन बनाने के लिए रसोई घर बनाया गया है। लेकिन उसमें ताला बंद है। ठेकेदार अपने हिसाब से बाहर से भोजन मंगाकर देता है। इसके चलते अन्य मरीजों को परेशानियां झेलनी पड़ती है।

साढ़े तीन घंटे में 864 आए मरीज
सुबह आठ से 11.30 बजे तक ओपीडी के लिए 864 मरीजों का रजिस्ट्रेशन हुआ था। लेकिन 12 बजे के बाद डॉक्टर अपने कक्ष से चले गए। इसके चलते अधिकांश मरीजों को बिना इलाज वापस जाना पड़ा।

बेतरतीब तरीके से खड़ी होते हैं वाहन
जिला अस्पताल के बाहर सड़क पर बेतरतीब तरीके से लोग खड़ा करते हैं। इमरजेंसी से लेकर जिला अस्पताल गेट तक वाहनों की कतार रहती है। इसके चलते अस्पताल आने वालों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
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लैब में तैनात संविदाकर्मी करते हैं मनमानी
जिला अस्पताल के लैब में निशुल्क जांच के लिए संविदाकर्मी तैनात है। इनका कहना है कि सुबह 11 बजे तक ब्लड जांच के लिए सैंपल लिया जाता है। इसके बाद जाने वाले मरीजों को वापस लौटा दिया जाता है। लेकिन दलालों के लिए कोई वक्त तय नहीं है।
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