देवरिया। सीएमओ कार्यालय में दो कर्मचारियों के खींचतान में एनएचआरएम की फाइलें कार्यालय में कैद हैं। रि-पोस्टिंग पर आए बाबू ने अपने हिसाब से फाइल तैयार कर काम शुरू कर दिया है। ऑडिट के लिए संभावित तिथि आने से विभागीय अफसरों की चिंताएं बढ़ गई हैं। एनएचआरएम बाबू और सीएमओ के बीच इसको लेकर करीब दो घंटे तक वार्ता हुई।
एनएचआरएम घोटाला के वक्त सीबीआई जांच के दौरान विभागीय बाबू संजय मिश्र का तबादला मिर्जापुर हो गया था और चार्ज दीपक वर्मा को मिल गया। संजय मिश्र भी अपने कार्यालय में ताला बंद कर चले गए और चार्ज नहीं दिया। सीएमओ ने ताला तोड़वाने के लिए तत्कालीन एसडीएम को पत्र लिखा। एसडीएम ने तत्कालीन तहसीलदार को आदेश दिया, लेकिन अफसरों की लापरवाही के चलते कार्यालय का ताला नहीं खुला और नए सिरे से फाइल तैयार कर दीपक वर्मा ने कार्य शुरू किया। करीब डेढ़ माह पूर्व दीपक वर्मा का तबादला मिर्जापुर हो गया और संजय मिश्रा का देवरिया हो गया। 19 जुलाई को दीपक यहां से रिलीव हो गए। अभी तक चार्ज संजय मिश्रा को नहीं दिया है और न ही मिर्जापुर में ज्वाइन किया। बाबू ने जिस कार्यालय में अपना ताला लगाया है, उसमें करीब डेढ़ साल से अधिक की एनएचआरएम की महत्वपूर्ण फाइलें बंद हैं। वहीं बाबू संजय अपने कार्यालय में नई फाइलों को तैयार कर काम कर रहे हैं। दोनों कर्मचारियों के बीच में कोई अफसर बोलने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। 24 को संभावित आडिट होने की तिथि आई है। इसको लेकर कार्यालय में बंद पड़ी फाइलों का लेखाजोखा नहीं मिलने से अफसरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि अभी मै नया आया हूं। इसकी जानकारी नहीं है। कार्यालय में ताला बंद होना गंभीर बात है। इसकी जानकारी कराता हूं।
नेता एक-दूसरे की कर रहे हैं पैरवी
देवरिया। बाबू दीपक वर्मा का तबादला रुकवाने के लिए जहां सत्ता पक्ष के एक मंत्री अपनी ताकत लगाए हैं। वहीं सत्ता पक्ष के एक विधायक दूसरे बाबू की पैरवी कर रहे हैं। इसको लेकर अफसर भी काफी पशोपेश में हैं।