देवरिया। मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन के अभाव बच्चों की मौत के बाद भी स्वास्थ्य महकमा नहीं चेता है। जिला अस्पताल में ऑक्सीजन तो पर्याप्त है, लेकिन जीवनरक्षक दवाइयों की कमी है। इमरजेंसी से लेकर ओपीडी में आने वाले रोगियों को अधिकांश दवाइयां बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। अस्पताल में कई जीवनरक्षक दवाएं खत्म हैं। इसको लेकर तीमारदारों और डॉक्टरों के बीच अक्सर तकरार होती है।
सरकारी अस्पतालों में मुफ्त में दवाई और इलाज का दावा हवाहवाई साबित हो रहा है। जिला अस्पताल में रोगियों को दवा खरीदने के लिए जेब ढीली करनी पड़ती है। शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज में दिल दहलाने वाली हुई घटना के बाद भी जिम्मेदार सबक नहीं ले रहे हैं। शनिवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉ. आरके श्रीवास्तव की ड्यूटी थी। रोगी मजबूरी में बाहर से दवा खरीद रहे थे। बेड के अभाव में रोगियों को फर्श और कुर्सी पर लिटाकर ग्लूकोज चढ़ाया जा रहा था। इन दिनों जिला अस्पताल में एंटी फंगल, सीप्रा इंजेक्शन समेत कई जीवनरक्षक दवाइयां खत्म हैं। इसकी वजह कई दवा सप्लाई कंपनियों का 50 लाख रुपये से अधिक का बकाया होना बताया जा रहा है। रोगी सिस्टम को कोस रहे हैं, लेकिन कमी पर पर्दा डालते हुए जिला अस्पताल के जिम्मेदार दवा और व्यवस्था चकाचक होने की बात कह रहे हैं। सीएमओ डॉ. रामनिवास ने बताया कि दवा खरीद का सिस्टम थोड़ा बदल गया है। इस वजह से दवा कंपनियों का रकम बकाया है और दवाइयों की समस्या बढ़ी है। इसे बहुत जल्द ठीक कर लिया जाएगा।
सीएमओ ने जाना अस्पताल का हाल
जिला अस्पताल में शनिवार को जेई/एईएस वार्ड में सात बच्चे भर्ती थे। रोज की अपेक्षा वार्ड की व्यवस्था बेहतर रही। सीएमओ ने भी जिला अस्पताल में भ्रमण कर सीएमएस से जानकारी हासिल की, लेकिन जीवनरक्षक दवाओं की कमी की जानकारी सीएमओ को नहीं हुई।