उल्टी-दस्त, बुखार, सांस से पीड़ित बच्चे इलाज के लिए पहुंच रहे
15 बेड पीआईसीयू के फुल
28 बच्चों का हो रहा इलाज
01 बेड पर दो बच्चे हैं भर्ती
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संवाद न्यूज एजेंसी
देवरिया। मेडिकल कॉलेज में बीमार बच्चों की संख्या में रोजाना बढ़ोतरी हो रही है। इसमें बुखार, उल्टी, दस्त, सांस से पीड़ित मरीज अधिक रह रहे हैं। इसके चलते व्यवस्था लड़खड़ा गई है। बेड कम पड़ जा रहे हैं। एक बेड पर दो मरीज का इलाज किया जा रहा है। इससे बच्चों के साथ परिजन परेशान हैं।
गर्मी का सबसे अधिक असर बच्चों की सेहत पर पड़ रहा है। थोड़ी लापरवाही भारी पड़ ही है। वायरल इंफेक्शन के कारण बच्चे बीमार हो रहे हैं। बुखार, उल्टी, दस्त, सांस की चपेट में आ रहे हैं। वहीं, खांसी, पेट दर्द से पीड़ित हो जा रहे हैं। बुधवार को दोपहर करीब दो बजे महुआडी क्षेत्र के रघु यादव अपने एक साल के नाती दुर्गेश पुत्र हरिओम को लेकर पहुंचे। बच्चे को दस दिन से बुखार आ रहा था। गांव के पास दवा कराने पर आराम नहीं हुआ तो इमरजेंसी पहुंचे, वहां से उन्हें पीआईसीयू भेज दिया गया।
इससे पहले नौ बजे से 12:30 बजे के बीच खुखुंदू क्षेत्र के सत्यम 9, रामपुर करकटही की प्रीती 12, तिलई बेलवा की आराधना एक साल, बरियारपुर क्षेत्र के शिवनाथ 3, इसी बीच की प्रिया 12, गौरीबाजार क्षेत्र की परी 3 को परिजनों ने भर्ती कराया। बच्चे बुखार, उल्टी-दस्त से पीड़ित थे।
पीआईसीयू में 15 बेड पर 12 बजे तक थे 28 बच्चे
15 बेड के पीआईसीयू में दोपहर 12 बजे तक 28 बच्चों का इलाज चल रहा था। जबकि चिल्ड्रेन वार्ड में 29 बच्चे भर्ती थे। दोनों वार्ड मिलाकर बुखार से पीड़ित 32, उल्टी-दस्त के 16, सांस के 6, पेट दर्द से पीड़ित बच्चे भर्ती थे। अधिक संख्या में बीमार बच्चों के पहुंचने से व्यवस्था चरमरा गई है। बेड कम पड़ रहे हैं, जिससे एक बेड पर दो-दो बच्चों का इलाज किया जा रहा है। दिक्कत को देखते हुए कुछ लोग निजी अस्पतालों में चले जा रहे हैं। जबकि बच्चों के लिए 42 बेड का एक वार्ड बना है। इसमें 30 बेड का पीआईसीयू, आठ बेड एचडीयू है, लेकिन कुछ कमी के कारण अभी हैंडओवर नहीं लिया गया है। इसके चलते दिक्कत हो रही है। अगर वह चालू हो जाए तो पीआईसीयू में बेड की संख्या दोगुनी हो जाएगी।
जिंक सीरप की हुई कमी
अस्पताल में जिंक सीरप की कमी हो गई है। जरूरत पड़ने पर तीमारदारों को बाहर से खरीदना पड़ रहा है। उधर, ओपीडी में भी भीड़ हो रही है। बुधवार को करीब 125 मरीज पहुंचे। डॉ. आरके श्रीवास्तव ने इलाज किया। मरीजों को दवा के साथ सावधानी बरतने की सलाह भी दी गई।
इस मौसम में वायरस का संक्रमण होता है। रोग प्रतिरोध क्षमता कम होने के कारण बच्चे बीमार हो जाते हैं। दूषित खानपान, सफाई न होने, धूप से बुखार, उल्टी-दस्त, सांस, निमोनिया, पेट दर्द आदि से पीड़ित हो जाते हैं। रोटा वायरस के कारण बच्चे डायरिया की चपेट में आ जाते हैं। बीमारी को ठीक होने में पांच से सात दिन का समय लग जा रहा है। दिक्कत होने पर डॉक्टर से संपर्क कर दवा लेनी चाहिए।
-डॉ. इकबाल, बाल रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज
ये बरतें सावधानी
धूप में न निकलें और न खेलें
चेहरा ढक कर व टोपी, छाता लगा कर निकलें
साफ-सफाई का ध्यान रखें
तला, भूना व फास्ट फूड का सेवन न करें
हल्का शाकाहारी भोजन करें
पानी का पर्याप्त मात्रा में सेवन करें
हरी पत्तेदार साग-सब्जी का भरपूर प्रयोग करें
सड़क किनारे बिकने वाले जूस व कटे फल से परहेज करें
हल्का सूती कपड़ा पहनें
छह माह तक के बच्चों को हर दो-दो घंटे मां का दूध पिलाएं
कोट
अस्पताल में बुखार, उल्टी, दस्त, खांसी, पेट दर्द से पीड़ित मरीज बढ़े हैं। इस मौसम में बच्चों को लेकर सावधानी बरतने की जरूरत है। दिक्कत होने पर लापरवाही न करें। बाल रोग विशेषज्ञ से संपर्क कर इलाज कराएं। अस्पताल में इलाज, दवा, जांच की सुविधा है। जिस दवा की कमी है उसे मंगाने की प्रक्रिया की जा रही है। मरीज की संख्या अधिक होने से परेशान है। कमी दूर होने के बाद नया पीआईसीयू वार्ड शुरू हो जाएगा।
-डॉ. एचके मिश्रा, सीएमएस