देवरिया। डॉ. अब्दुल खालिद की हत्या करने वाले शूटरों गिरफ्तारी के बाद पुलिस के खुलासे में नया मोड़ आ सकता है। पुलिस एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल जरूर भेज दी है। लेकिन वारदात को अंजाम देने वाले शूटरों का पता नहीं लगा सकी है। हाई प्रोफाइल मामला होने के कारण पुलिस आरोप के आधार पर जांच कर रही है। लेकिन पुलिस के पर्दाफाश में झोल है। इसकी चर्चा आम लोगों में है।
कुशीनगर के पटहेरवा थानाक्षेत्र के बेलवा आलमदासपुर गांव निवासी डॉ. अब्दुल खालिद बघौचघाट के सखनी न्यू पीएचसी पर चिकित्सक थे। 25 सितंबर को ड्यूटी से घर जाते समय दिनदहाड़े बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दिया। चिकित्सक के पत्नी की तहरीर पर पुलिस ने चिकित्सक के गांव निवासी रामइकबाल राय और इनके बेटे मनीष राय सहित दो अज्ञात लोगों पर केस दर्ज किया। तीसरे दिन पुलिस ने रामइकबाल राय को गिरफ्तार कर लिया और 24 घंटे तक हिरासत में रखकर पूछताछ की। गुरुवार को तीन साल पूर्व कसया में रामइकबाल राय प्रिंस की हुई हत्या के प्रतिशोध में चिकित्सक की हत्या कराने का दावा करते ह़ुए घटना का पर्दाफाश किया जो लोगों के गले नहीं उतर रहा है। सवाल उठता है कि अगर रामइकबाल राय को हत्या कराना था तो बेटे प्रिंस के मुख्य कातिल चिकित्सक के चचेरा भाई फजिउलजमा की कराया होता। अगर शूटरों से हत्या की सौदा तय हुई होती तो पुलिस की पूछताछ में शूटरों का नाम सामने आया होता। ऐसे कई सवाल पुलिस के खुलासों पर सवाल खड़ा कर रहे है। सूत्रों की माने तो डॉ. अब्दुल खालिद एक प्रतिष्ठित व्यक्ति थे। इसकी वजह से हत्यारोपी फजिउलजमा से दूरी बन गई थी। बीच में किसी बात को लेकर तकरार भी हुई थी। अगर पुलिस निष्पक्ष तरीके से मामले की विवेचना करे और घटना में शामिल असली शूटर पकड़े जाए तो डॉ. अब्दुल खालिद की हत्या के बाद हुए पर्दाफाश में नया मोड़ आ सकता है। एसपी राकेश शंकर ने बताया कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई हुई है। पुलिस अन्य बिंदुओं पर भी जांच कर रही है। घटना में शामिल शूटरों का पता नहीं चल सका है। तीन टीमें जांच के लिए लगाई गई है।