देवरिया। वार्डों के आरक्षण का निर्धारण तैयार करने में जिम्मेदार उदासीन हैं। डेडलाइन बीते तीन दिन गुजर चुके हैं। बावजूद इसके सूची को फाइनल करने में जिम्मेदार पहल नहीं कर रहे हैं। इसके चलते निकायों के अफसरों की मंशा पर सवाल उठ रहे हैं। चर्चा है कि जानबूझ कर देरी की जा रही है। दरअसल कई प्रभावशाली नेताओं के करीबी लोग सभासद पद के दावेदार हैं। ऐसे में आरक्षण का निर्धारण उनके लिए आड़े आ सकता है।
जिले के 11 निकायों में 166 वार्ड हैं जिनमें महिला, अन्य पिछड़ा वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग महिला, अनुसूचित जाति अनुसूचित जाति महिला, अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जनजाति महिला के लिए आरक्षित होना है। ओबीसी की रैपिड सर्वे, वर्ष 2011 की जनगणना और परिसीमन का पालन करना है। नगर विकास विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह ने 18 सितंबर तक वार्डों के आरक्षण का प्रस्ताव उपलब्ध कराने का आदेश दिया था। बावजूद इसके वार्डों के आरक्षण का कार्य निर्धारित अवधि में पूरा नहीं हो सका। देवरिया नगर पालिका परिषद के अलावा अन्य निकायों में भी कुछ ऐसे वार्ड हैं, जो आरक्षण के दायरे में आ रहे हैं। इन वार्डों से भाजपा के कुछ पदाधिकारी और उनके परिवार के लोग दावेदार हैं। इन लोगों ने बैनर और फ्लैक्स के जरिए इलाके में मौजूदगी दिखा रहे हैं, लेकिन आरक्षण के चलते वह लोग चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं। इसके चलते निकाय के अफसर वार्डों के बारे में फैसला करने से कतरा रहे हैं। आरक्षण का मौजूदा स्वरूप जारी होने से कई सभासद भी चुनाव लड़ने से वंचित हो सकते हैं। इन लोगों का निकायों के निर्माण, सफाई कार्यों में दखल रहा है। ऐसे में वह लोग भी सदन में दोबारा उपस्थिति चाह रहे हैं। इस बाबत सीताराम गुप्त, एडीएम वित्त राजस्व ने कहा कि वार्डों का आरक्षण तैयार हो रहा है। निकाय के अफसरों को निर्देश दिया गया है। जल्द ही सूची तैयार हो जाएगी।