डॉ. केएन मल्ल
एकौना,रुद्रपुर। हड़हा गांव में सरकार की महत्वकांक्षी स्वच्छ भारत योजना का अधिकारी माखौल उड़ा रहे हैं। खुले में शौच मुक्त गांव घोषित हो चुके इस गांव की जमीनी हकीकत अलग कहानी बयां कर रही है। गांव में न तो खुले में शौच करना बंद हुआ है और न ही घर में शौचालय का निर्माण हुआ है। गांव में निर्मित शौचालय का उपयोग भी अपेक्षाकृत बहुत कम हो रहा है।
मंगलवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने खुले में शौच मुक्त गांव घोषित हो चुके हड़हा गांव की पड़ताल की। स्वच्छ भारत अभियान के तहत गांव में बीपीएल परिवारों को 146 शौचालय की धनराशि आवंटित की गई है। इसके सापेक्ष 45 शौचालयों का निर्माण पूरा हो पाया है। नवनिर्मित शौचालयों का भी उपयोग नहीं हो रहा। खुले में शौच मुक्त गांव घोषित करने के लिए सरकार की ओर से निर्धारित मानक के अनुसार बीपीएल परिवारों को शौचालय निर्माण के लिए 12 हजार रुपये का अनुदान दिया जाता है।
गरीबी रेखा से ऊपर जीवन-यापन करने वालों को शौचालय निर्माण के लिए प्रेरित किया जाता है। ऐसे में इस गांव में शत-प्रतिशत शौचालयों का निर्माण पूरा नहीं हो पाया है, जबकि ब्लॉक के अधिकारियों ने कागज में बाजीगिरी दिखा कर इस गांव में खुले में शौच मुक्त गांव घोषित कर दिया है। जिले को भेजी रिपोर्ट में गांव में 143 शौचालय पूर्ण और तीन निर्माणाधीन बताया गया है, जो वास्तविकता से भिन्न है। इस बात पर सवाल खड़ा करने पर ब्लॉक के अधिकारी सकते में आ गए। इस बाबत संपूर्ण स्वच्छता के जिला परियोजना निदेशक रविशंकर राय ने कहा कि मामला गंभीर है। त्रिस्तरीय जांच कमेटी से गांव का भौतिक सत्यापन करा कर फर्जी रिपोर्ट देने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।