देवरिया। फोरलेन का सपना संजोए लोगों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा। विभागीय उदासीनता के कारण निर्माण कार्य अब तक रफ्तार ही नहीं पकड़ सका है। शहरी क्षेत्र में गोरखपुर ओवरब्रिज से रुद्रपुर मोड़ तक फोरलेन का काम मई तक हर हाल में पूरा करना था, मगर आधा हिस्सा भी नहीं बन पाया है। डिवाइडर और किनारे की पटरियों पर कोई काम नहीं होने से राहगीर हादसों के शिकार हो रहे हैं। बारिश में यह खतरा और बढ़ेगा। बार-बार हिदायतों के बावजूद निर्माण को गति न मिलने से फोरलेन पर चलने के मंसूबों पर पानी फिरता दिख रहा है।
गोरखपुर से सलेमपुर तक फोरलेन निर्माण के लिए मई 2013 में कार्ययोजना तैयार हुई। वन विभाग और पीडब्लूडी के बीच लंबे समय तक पेच फंसा रहा। सड़क के किनारे पेड़ों की कटाई कराने के बाद वर्ष 2017 में फोरलेन का निर्माण कार्य शुरू हुआ। विभागीय अफसरों की उदासीनता के कारण कार्य की गति काफी धीमी रही। धन की कमी बताने के बाद करीब छह माह पूर्व शासन ने दूसरे किस्त में करीब 32 करोड़ रुपये पीडब्लूडी को दिया। जाम से निजात दिलाने का हवाला देते हुए पीडब्लूडी ने प्राथमिकता के तौर पर शहर में फोरलेन का निर्माण कराने की बात कही और काम भी शुरू हो गया। आधा-अधूरा कार्य कराने के बाद ठेकेदार शहर के बाहर निर्माण कार्य ठेकेदार कराने लगा। इससे शहरवासियों की और मुश्किलें बढ़ गईं। मामला संज्ञान में आने पर डीएम सुजीत कुमार ने सख्त हिदायत दी तो शहर के अंदर फिर कार्य शुरू हुआ है। भटवलिया से रुद्रपुर मोड़ तक सड़क के किनारे खुदाई कर छोड़ दिया गया है, जो राहगीरों के लिए खतरनाक साबित हो रहा है। बरसात के मौसम में लोगों को और दुश्वारियां झेलनी पड़ेगी। उधर, मुसैला से खुखुंदू के पास तक फोरलेन का कार्य तो हुआ, लेकिन डिवाइडर नहीं बन पाया है।
फोरलेन के लिए काटे गए 28 हजार पेड़
केंद्र सरकार ने फोरलेन निर्माण की घोषणा किया, लेकिन सपा सरकार से एनओसी नहीं मिलने से काफी समय तक निर्माण शुरू नहीं हो सका। बाद में प्रत्येक जिला मुख्यालय को फोरलेन से जोड़ने की योजना के तहत यहां भी कार्य शुरू किया गया। फोरलेन के लिए कुल 28133 पेड़ काटे गए। इन पेड़ों के बदले पौधरोपण के लिए वन विभाग ने गैर जनपद में जमीन उपलब्ध कराई है।
मानकों की अनदेखी कर रही कार्यदायी संस्था
फोरलेन निर्माण का कार्य एक तरफ से कराने के बजाए अलग-अलग कई हिस्सों में कराया जा रहा है। इसमें मानकों की अनदेखी भी की जा रही है। शहर से बाहर बनी सड़कों को बिना तोड़े और लेबल किए उसके ऊपर ही पिच किया जा रहा है। देवरिया से सलेमपुर तक सड़क के किनारे गड्ढा खोदकर छोड़ दिया गया है। इससे दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं। इससे बचाव के लिए किसी प्रकार का संकेतक नहीं बनाया गया है।
बजट के अभाव में प्रभावित हुआ काम
गोरखपुर से देवरिया होते हुए सलेमपुर तक निर्माणाधीन फोरलेन सड़क के लिए शासन से 335 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत है। अब तक शासन से महज 80 करोड़ रुपये ही मिल पाए हैं। इस धनराशि से करीब एक चौथाई फोरलेन निर्माण का कार्य पूरा किया जा चुका है।
-डीके चौधरी, एक्सईएन, देवरिया।
* 335 करोड़ रुपये लागत हैं गोरखपुर-सलेमपुर तक फोरलेन निर्माण का।
* 80 करोड़ रुपये ही मिल पाएं हैं अब तक।
* 81 किमी लंबा है प्रस्तावित फोरलेन।
* 04 किमी है शहरी क्षेत्र में फोरलेन की लंबाई।